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मोनाड यूनिवर्सिटी का बड़ा घोटाला: 4 साल में बांटी 1 लाख फर्जी डिग्रियां, 228 लोग सरकारी नौकरी में शामिल

मोनाड यूनिवर्सिटी का बड़ा घोटाला: 4 साल में बांटी 1 लाख फर्जी डिग्रियां, 228 लोग सरकारी नौकरी में शामिल

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा क्षेत्र स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी एक बड़े फर्जी डिग्री घोटाले में फंस गई है। एसटीएफ की छापेमारी के बाद अब प्रशासन भी यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसने लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अभिषेक पांडे और पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह ने प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की है, ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ रोका जा सके।

पुलिस ने इस मामले में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा समेत 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी में कोविड काल से ही फर्जी डिग्रियों का कारोबार चल रहा था और अब तक करीब एक लाख फर्जी डिग्रियां तैयार कर विभिन्न राज्यों में बेची जा चुकी हैं।

एसटीएफ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि करीब 228 लोग इस यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियों के आधार पर सरकारी नौकरी कर रहे हैं। इनमें हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र के युवा प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में भी कई युवा मोनाड की डिग्री के बल पर प्राइवेट और सरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं।

एसटीएफ को लगभग एक माह पूर्व यूनिवर्सिटी से फर्जी डिग्री बेचे जाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद 5 मई को लखनऊ से एक टीम हापुड़ और गाजियाबाद पहुंची और जांच शुरू की। जांच में यह भी पता चला कि यूनिवर्सिटी का नेटवर्क देश के नौ राज्यों तक फैला हुआ है, जहां एजेंटों के माध्यम से डिग्रियां बेची जाती थीं।

इस घोटाले में अन्य राज्यों से भी गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल एसटीएफ की जांच जारी है और इस घोटाले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। प्रशासन की नजर अब यूनिवर्सिटी की मान्यता को लेकर कड़े फैसले पर है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके।

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