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इतिहास से छेड़छाड़ कर अर्कवंशी समाज के योगदान को मिटाने की साजिश का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

लखनऊ, 7 जुलाई। अर्कवंशी क्षत्रिय महासभा ने संडीला और मलिहाबाद के प्राचीन इतिहास को लेकर इतिहास से छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मंगलवार को लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में महासभा के पदाधिकारियों ने दावा किया कि एक विशेष वर्ग और कुछ […]

इतिहास से छेड़छाड़ कर अर्कवंशी समाज के योगदान को मिटाने की साजिश का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

लखनऊ, 7 जुलाई। अर्कवंशी क्षत्रिय महासभा ने संडीला और मलिहाबाद के प्राचीन इतिहास को लेकर इतिहास से छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मंगलवार को लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में महासभा के पदाधिकारियों ने दावा किया कि एक विशेष वर्ग और कुछ राजनीतिक तत्व ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर अर्कवंशी समाज के योगदान और बलिदान को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं।

महासभा के अध्यक्ष इंजीनियर आर. ए. सिंह अर्कवंशी ने कहा कि संडीला और मलिहाबाद का इतिहास प्रमाणिक दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज है, लेकिन सुनियोजित तरीके से उसे बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल इतिहास का विवाद नहीं, बल्कि एक समाज की विरासत और पहचान से जुड़ा विषय है।

ऐतिहासिक दस्तावेजों का किया हवाला

पत्रकार वार्ता के दौरान महासभा ने कई ऐतिहासिक स्रोतों का उल्लेख करते हुए अपने दावों को पुष्ट करने का प्रयास किया।

महासभा के अनुसार, ‘गजेटियर ऑफ द प्रोविंस ऑफ अवध’ (भाग-3, वर्ष 1878, पृष्ठ 301) में उल्लेख है कि अरख वंश के दो सगे भाइयों सल्हीय और मल्हीय ने क्रमशः सलहियापुरवा (वर्तमान संडीला) और मलिहाबाद की स्थापना की थी तथा 14वीं शताब्दी के अंत तक इस पूरे क्षेत्र पर अर्कवंशी शासकों का प्रभाव था।

इसी प्रकार ‘तारीख-ए-संडीला’ (1913) का हवाला देते हुए महासभा ने कहा कि संडीला के तत्कालीन तालुकेदार राजा दुर्गा प्रसाद द्वारा लिखित इस ग्रंथ में भी सल्हीय और मल्हीय द्वारा इन दोनों नगरों की स्थापना का उल्लेख मिलता है।

महासभा ने इतिहासकार पंडित छोटेलाल शर्मा द्वारा लिखित ‘जाति अन्वेषण’ (भाग-1) तथा ‘जाति माला’ का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि 14वीं शताब्दी तक मुरादाबाद से लेकर लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र तक अर्कवंशी समाज का प्रभाव और शासन स्थापित था।

प्रवेश द्वार विवाद पर लगाए गंभीर आरोप

महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील अर्कवंशी ने आरोप लगाया कि मलिहाबाद में प्रस्तावित प्रवेश द्वार के नाम को लेकर भी तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। उनका कहना था कि सरकार द्वारा नाम तय किए जाने के बावजूद कुछ लोगों ने रातों-रात ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को अपनी जाति से जोड़ते हुए नया प्रवेश द्वार स्थापित करने का प्रयास किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम अर्कवंशी समाज के बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को कमजोर करने की मंशा से उठाया गया है। महासभा का कहना है कि समाज ने इस पूरे मामले का विरोध शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से किया है।

जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग

महासभा ने उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के लगभग दो करोड़ अर्कवंशी समाज की ओर से लखनऊ के जिलाधिकारी से मांग की कि पूरे विवाद की जांच इतिहासकारों के एक स्वतंत्र और उच्चस्तरीय विशेषज्ञ पैनल से कराई जाए।

महासभा ने कहा कि प्रस्तुत किए गए गजेटियर, ऐतिहासिक ग्रंथों और अन्य अभिलेखों की प्रमाणिकता की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा इतिहास को विकृत करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।

महासभा ने यह भी कहा कि हरदोई में पूर्व में प्रशासन द्वारा ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया गया था और लखनऊ में भी उसी प्रकार तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

कई पदाधिकारी रहे मौजूद

पत्रकार वार्ता में महासभा के अध्यक्ष इंजीनियर आर. ए. सिंह अर्कवंशी, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील अर्कवंशी, वी. के. सिंह अर्कवंशी, रामसागर अर्कवंशी, सौरभ अर्कवंशी, अशोक अर्कवंशी, सोभित अर्कवंशी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी, बुद्धिजीवी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

महासभा ने स्पष्ट किया कि उसकी मांग किसी समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों के संरक्षण और प्रमाणिक इतिहास को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की जा रही है।

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