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पार्टी बदलने वाले MP-MLA पर 10 साल का बैन! कपिल सिब्बल के प्रस्ताव को CJP का समर्थन

पार्टी बदलने वाले MP-MLA पर 10 साल का बैन! कपिल सिब्बल के प्रस्ताव को CJP का समर्थन

राजनीतिक दलों में होने वाले दल-बदल और कथित हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पैसे या दबाव के चलते राजनीतिक पार्टी बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर 10 साल का प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। उनके इस प्रस्ताव का कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने समर्थन किया है। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने इसे समय की जरूरत बताया है।

केरल के कोच्चि में ‘हॉर्स ट्रेडिंग और लोकतंत्र’ विषय पर बोलते हुए कपिल सिब्बल ने संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में मौजूद उस प्रावधान पर सवाल उठाया, जिसके तहत किसी विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य दूसरी पार्टी में चले जाते हैं तो उसे विलय माना जा सकता है और दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता खत्म नहीं होती।

सिब्बल का कहना है कि इस व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि ‘विलय’ का अर्थ वास्तविक राजनीतिक दलों का विलय हो, न कि विधायकों का सामूहिक रूप से एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चले जाना। उनका प्रस्ताव है कि यदि कोई सांसद या विधायक पैसे या दबाव के कारण अपनी पार्टी बदलता है तो उस पर लंबे समय तक चुनाव लड़ने या सार्वजनिक पद संभालने पर रोक लगनी चाहिए।

CJP ने सिब्बल के इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे अपने पहले मांग-पत्र से जुड़ा हुआ बताया है। संगठन के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि अगर कोई सांसद या विधायक किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतने के बाद पैसे या दबाव के कारण दूसरी पार्टी में शामिल होता है तो ऐसे व्यक्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सिब्बल की ओर से प्रस्तावित 10 साल के प्रतिबंध का स्वागत किया।

सौरव दास के मुताबिक, CJP के पहले मांग-पत्र में इससे भी कड़ा प्रावधान सुझाया गया था। उनके अनुसार, राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके की ओर से जारी मांग-पत्र के पांचवें बिंदु में ऐसे नेताओं को 20 साल तक किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने या चुनाव लड़ने से रोकने का प्रस्ताव रखा गया था।

CJP का कहना है कि राजनीतिक दलों को तोड़ना, सांसदों और विधायकों को कथित तौर पर बड़ी रकम का लालच देकर पाला बदलवाना और चुनी हुई सरकारों को गिराना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। सौरव दास ने कहा कि मौजूदा दल-बदल विरोधी कानून पुराना हो चुका है और इसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में रहने की राजनीतिक इच्छा के कारण इस कानून का दुरुपयोग भी हुआ है और युवाओं की भूमिका से इसमें बदलाव लाया जा सकता है।

फिलहाल कपिल सिब्बल का 10 साल के प्रतिबंध का प्रस्ताव एक राजनीतिक और संवैधानिक बहस का हिस्सा है। इसे लागू करने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची में संशोधन की आवश्यकता होगी। वहीं, CJP की ओर से इसे समर्थन मिलने के बाद दल-बदल विरोधी कानून को और सख्त करने की मांग को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।

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