जाली नोटों के बाद नकली सिक्कों का खुलासा, सोनीपत से फैक्टरी समेटकर सहारनपुर पहुंचे थे आरोपी
जाली नोटों के बाद अब नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का भी खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने नकली सिक्के तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 1.28 लाख रुपये के नकली सिक्के, छह मशीनें, सिक्के बनाने वाली डाई और करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के समेत अन्य सामान बरामद किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पुलिस की कार्रवाई के डर से कुछ दिन पहले ही हरियाणा के सोनीपत स्थित अपनी फैक्टरी को बंद कर दिया था।
पुलिस जांच के मुताबिक इस गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है। उसने हरियाणा के सोनीपत स्थित राई इंडस्ट्रीज एरिया में नकली सिक्के बनाने की फैक्टरी स्थापित कर रखी थी। गिरोह के सदस्य करीब पांच महीने से यहां सक्रिय थे और तैयार किए गए नकली सिक्कों की सप्लाई बिहार, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में की जा रही थी।
मामले में अहम मोड़ आठ सितंबर को आया, जब दिल्ली पुलिस ने गिरोह के सदस्य पारस जैन को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से करीब एक लाख रुपये के नकली सिक्के बरामद हुए थे। इनमें 20-20 रुपये के नकली सिक्के शामिल थे। पारस की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के सदस्यों को डर सताने लगा कि पूछताछ के दौरान वह सोनीपत स्थित फैक्टरी का पता पुलिस को बता सकता है।
इसी डर के चलते मुख्य सरगना उपकार लूथरा ने अपने साथियों हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष और अनुराग पाल उर्फ लंकेश के साथ मिलकर 10 सितंबर को सोनीपत की फैक्टरी को पूरी तरह समेट दिया। बताया जा रहा है कि उस समय दिल्ली और सोनीपत पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में दबिश दे रही थी। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपियों ने नया ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया था।
जांच में पता चला कि आरोपियों को नया ठिकाना स्थापित करने के लिए सहारनपुर सबसे सुरक्षित जगह लगा। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि सहारनपुर से उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों की ओर आसानी से निकला जा सकता है। आरोपियों की योजना सहारनपुर में नई फैक्टरी लगाकर नकली सिक्कों का निर्माण शुरू करने की थी, लेकिन फैक्टरी पूरी तरह स्थापित होने से पहले ही पुलिस ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह नकली सिक्के तैयार करने के लिए जरूरी कच्चा माल दिल्ली से मंगाता था। मुख्य सरगना ने कच्चा माल लाने की जिम्मेदारी हिमांशु और संतोष को दे रखी थी। इसके लिए गिरोह के सदस्य एक कार का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने जो कार बरामद की है, वह स्विफ्ट डिजायर है और उसका पंजीकरण प्रयागराज का बताया जा रहा है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी संतोष ने अपने सगे भाई अखिलेश को भी इस गिरोह में शामिल कर रखा था। पुलिस ने अखिलेश को मामले में नामजद किया है, हालांकि अभी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस उसकी तलाश में भी दबिश दे रही है।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में गिरोह में करीब सात से आठ लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर दबिश दे रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ नकली सिक्कों के निर्माण और उनकी सप्लाई से जुड़े नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आने की संभावना है।