2024 की हार से BJP ने लिया सबक! 2027 में आधे विधायकों के टिकट पर संकट?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और उम्मीदवार चयन की तैयारियां तेज कर दी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रदर्शन में आई गिरावट के बाद अब टिकट वितरण को लेकर भी रणनीति में बदलाव की चर्चा है। पार्टी के भीतर ऐसे उम्मीदवारों पर जोर देने की बात सामने आ रही है, जिनकी क्षेत्र में पकड़, संगठन के साथ तालमेल और जनता के बीच स्वीकार्यता मजबूत हो।
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सीटों की संख्या 2019 के 62 से घटकर 33 रह गई थी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। इस नतीजे के बाद बीजेपी के संगठन में चुनावी तैयारियों और कमजोर सीटों की समीक्षा का सिलसिला जारी है। सितंबर में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने भी यूपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर 2027 की तैयारियों, कमजोर विधानसभा क्षेत्रों और बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने पर फीडबैक लिया था।
उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी के अंदर यह चर्चा है कि केवल वरिष्ठता या पिछले चुनाव का रिकॉर्ड टिकट का आधार नहीं होगा। संभावित उम्मीदवार की मौजूदा स्थिति, क्षेत्र में उसकी सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ उसका तालमेल और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग स्तरों से फीडबैक और सर्वे का सहारा लेने की रणनीति पर काम होने की बात कही जा रही है।
मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर भी पार्टी के भीतर मंथन की चर्चा है। कुछ रिपोर्टों में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने की संभावना जताई गई है, हालांकि अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में किसी विधायक का केवल पिछला चुनाव जीतना ही पर्याप्त आधार नहीं माना जाएगा, बल्कि उसकी वर्तमान राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति को भी परखा जा सकता है।
टिकट वितरण में किसी एक बड़े नेता की व्यक्तिगत पसंद के बजाय संगठन के स्तर पर व्यापक सहमति बनाने की रणनीति पर भी चर्चा है। यदि किसी सीट पर प्रमुख नेताओं के बीच उम्मीदवार को लेकर मतभेद होता है, तो वरिष्ठ नेतृत्व की राय लेने और जरूरत पड़ने पर किसी तीसरे नाम पर विचार करने का विकल्प रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य उम्मीदवार चयन को व्यक्तिगत पैरवी के बजाय संगठनात्मक प्रक्रिया से जोड़ना बताया जा रहा है।
2024 के चुनावी प्रदर्शन के बाद बीजेपी के भीतर संगठन की जमीनी सक्रियता को लेकर भी समीक्षा हुई है। पार्टी की हालिया बैठकों में कमजोर विधानसभा क्षेत्रों की पहचान, बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
उम्मीदवार चयन में नए चेहरों को लेकर भी चर्चा है। युवा नेताओं, महिलाओं और संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देने पर पार्टी की नजर बताई जा रही है। अगस्त में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में उत्तर प्रदेश से जुड़े कई नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई थी। इसे पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में युवा नेतृत्व और अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
बीजेपी के सामने 2027 में एक तरफ अपने मौजूदा विधायकों और संगठन को मजबूत रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ 2024 में जिन क्षेत्रों में पार्टी को नुकसान हुआ, वहां दोबारा पकड़ बनाने की कोशिश भी है। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की सीटवार समीक्षा और जमीनी फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि किस सीट पर किसका टिकट कटेगा और किन नए चेहरों को मौका मिलेगा, इसका अंतिम फैसला चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।