ब्राह्मण उपजातियों पर टिप्पणी को लेकर स्वामी रामभद्राचार्य को कोर्ट का नोटिस, 12 अक्टूबर को सुनवाई
तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य से जुड़ा ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों पर कथित टिप्पणी का मामला अब अदालत पहुंच गया है। प्रयागराज की एसीजेएम कोर्ट संख्या-8 ने शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय की ओर से दाखिल मानहानि परिवाद पर सुनवाई करते हुए मामले को रजिस्टर करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्वामी रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्वामी रामभद्राचार्य की कथित टिप्पणी से ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों से जुड़े लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंची। इसी आधार पर उन्होंने अदालत में मानहानि का परिवाद दाखिल कर स्वामी रामभद्राचार्य को तलब करने और कानून के तहत कार्रवाई की मांग की।
विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में उपाध्याय, पाठक, चौबे, त्रिगुणायक और दीक्षित जैसी ब्राह्मण उपजातियों का उल्लेख करते हुए कथित टिप्पणी की गई थी। शिकायतकर्ता ने इसी बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे संबंधित समुदाय की सामाजिक छवि को प्रभावित करने वाला बताया है। हालांकि, वीडियो में कही गई बातों के पूरे संदर्भ और उनकी व्याख्या को लेकर विवाद बना हुआ है।
इस मामले से जुड़ा एक अन्य कानूनी घटनाक्रम भी सामने आ चुका है। सितंबर 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपाध्याय समुदाय और धर्मगुरुओं के संबंध में कथित टिप्पणी को लेकर स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली एक याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने संबंधित पक्ष को उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने का रास्ता बताया था।
अब प्रयागराज की अदालत में दाखिल मानहानि परिवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत ने 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। फिलहाल मामला परिवाद के स्तर पर है और अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें आने के बाद आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
स्वामी रामभद्राचार्य चित्रकूट स्थित तुलसी पीठ के संस्थापक और रामानंद संप्रदाय के जगद्गुरु हैं। उन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भी काम किया है और अनेक धार्मिक एवं साहित्यिक ग्रंथों की रचना की है। चित्रकूट में दिव्यांगों की शिक्षा के लिए उन्होंने संस्थान की स्थापना में भी भूमिका निभाई है।