‘हनुमान चालीसा पढ़ता रहा…’, PM मोदी से बात करते हुए भावुक हुए कैप्टन स्मित मछार
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में गंभीर संकट के दौरान अपनी सूझबूझ और साहस से सैकड़ों लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर बात की। बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक हो गए और उन्होंने उस खौफनाक घटना के दौरान अपने अनुभव प्रधानमंत्री के साथ साझा किए। प्रधानमंत्री ने भी मुश्किल परिस्थिति में उनके साहस, धैर्य और सूझबूझ की सराहना की और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
बातचीत के दौरान स्मित मछार ने बताया कि संकट के उस समय उन्हें अपनी जान बचाने के साथ-साथ विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा की भी चिंता थी। उन्होंने कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि अगर उन्होंने हिम्मत नहीं दिखाई तो विमान में मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, जिसके बाद अन्य क्रू सदस्यों और यात्रियों को मदद करने का मौका मिला।
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में स्मित ने बताया कि मुश्किल वक्त में उन्हें हनुमान चालीसा का पाठ करने से हिम्मत मिली। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें तकलीफ होती है, वह हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और उस समय भी वह यही करते रहे। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना आदर्श बताते हुए कहा कि उनसे बात करना उनके लिए बेहद खास और गौरव का क्षण है।
यह घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई थी। विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और उसमें 174 यात्री सवार थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच गंभीर संघर्ष हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, कैप्टन स्मित मछार पर को-पायलट ने हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान ने तेजी से ऊंचाई खोई, जिसके बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई।
गंभीर चोट लगने के बावजूद कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद केबिन क्रू और यात्रियों को अंदर पहुंचने तथा हमलावर को काबू करने में मदद मिली। विमान को बाद में सऊदी अरब के ताबुक में आपात स्थिति में उतारा गया। सभी 174 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। घटना की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है और हमले के मकसद को लेकर जांच जारी है।
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी कैप्टन स्मित की बहादुरी की सार्वजनिक रूप से सराहना कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प दिखाया। प्रधानमंत्री ने कैप्टन के परिवार से भी बात की थी और उनके इलाज तथा परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया था।
कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की चर्चा भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है। घटना के बाद उन्हें सुरक्षित रूप से विमान को आपात लैंडिंग तक पहुंचाने और संकट के बीच यात्रियों की जान बचाने में उनकी भूमिका के लिए सराहा जा रहा है।