यूपी राज्यसभा चुनाव: BJP ने उतारे 8 उम्मीदवार, OBC से ब्राह्मण और महिला चेहरे तक साधा सामाजिक समीकरण
उत्तर प्रदेश से होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी पहले ही राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। उम्मीदवारों के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं दीं और उनकी ऐतिहासिक जीत की कामना की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए घोषित सभी सम्मानित प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई। उन्होंने सभी उम्मीदवारों की विजय के लिए मंगलकामनाएं भी दीं। भाजपा के उम्मीदवारों की सूची पर नजर डालें तो इसमें संगठन से जुड़े नेताओं के साथ OBC, दलित, महिला, ब्राह्मण और पेशेवर क्षेत्र से आने वाले चेहरों को जगह दी गई है। ऐसे में इस सूची को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सामाजिक और संगठनात्मक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा ने प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। धर्मपाल सिंह लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भाजपा की संगठनात्मक राजनीति में आए हैं। सितंबर 2026 में उन्हें दूसरी बार उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर उनका विशेष जोर रहा है। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना संगठन में सक्रिय नेताओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने और सरकार-संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा लगातार बूथ स्तर की मजबूती पर जोर दे रही है और धर्मपाल सिंह इस रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
वहीं, प्रकाश पाल के जरिए भाजपा ने OBC प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का संदेश दिया है। जून 2026 में उन्हें भाजपा के प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया था। इससे पहले वह कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में OBC मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए प्रकाश पाल का चयन खासा अहम माना जा रहा है। 2027 में भाजपा के सामने समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण की चुनौती है। ऐसे में OBC चेहरे को राज्यसभा भेजकर भाजपा अपने सामाजिक आधार को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का संदेश देती दिख रही है।
भाजपा ने विद्यासागर सोनकर को भी राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। जौनपुर से जुड़े विद्यासागर सोनकर लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं और वर्तमान में विधान परिषद सदस्य हैं। दलित समाज से आने वाले सोनकर को राज्यसभा भेजने का फैसला भाजपा की दलित राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर गैर-जाटव दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखना भाजपा के लिए अहम है। ऐसे में पार्टी द्वारा दलित नेतृत्व को संसद में प्रतिनिधित्व देना उसके सामाजिक समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है।
महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से प्रियंका सिंह रावत का नाम भी महत्वपूर्ण है। बाराबंकी से 2014 में भाजपा की लोकसभा सांसद रह चुकीं प्रियंका सिंह रावत को 2026 में पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था। उनका राजनीतिक आधार अवध क्षेत्र से जुड़ा है। राज्यसभा में महिला चेहरे को भेजकर भाजपा एक तरफ महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अवध क्षेत्र में अपने राजनीतिक नेटवर्क को भी मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए उनका चयन राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
भाजपा की सूची में श्रुति गंगवार का नाम भी खास चर्चा में है। वह भाजपा के वरिष्ठ नेता और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। रोहिलखंड क्षेत्र में संतोष गंगवार की लंबे समय से राजनीतिक पकड़ रही है। ऐसे में श्रुति गंगवार को राज्यसभा भेजने के फैसले में महिला प्रतिनिधित्व के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण भी दिखाई देता है। इसे भाजपा की ओर से राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
राम प्रताप सिंह चौहान भी भाजपा की सूची में शामिल हैं। आगरा से आने वाले चौहान लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं और 2026 में उन्हें दोबारा भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। वह पहले एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और संगठन में लंबी सक्रियता उन्हें ब्रज और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। राज्यसभा के लिए उनका चयन भाजपा द्वारा अनुभवी संगठनात्मक चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका देने की रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
भाजपा ने राधाकांत ओझा को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। उनकी पृष्ठभूमि भाजपा के अन्य संगठनात्मक चेहरों से अलग है। पेशेवर और कानूनी क्षेत्र से आने वाले राधाकांत ओझा के चयन के जरिए पार्टी को कानूनी, बौद्धिक और पेशेवर वर्ग के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। प्रयागराज और पूर्वांचल की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए भी उनका नाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा के आठवें उम्मीदवार गोपी कृष्ण पांडेय हैं। उनकी उम्मीदवारी को पार्टी के सामाजिक संतुलन के संदर्भ में देखा जा रहा है। राज्यसभा उम्मीदवारों की पूरी सूची में भाजपा ने अलग-अलग सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को लेकर भी राजनीतिक चर्चा के बीच गोपी कृष्ण पांडेय का नाम पार्टी के व्यापक सामाजिक समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है।
कुल मिलाकर भाजपा की आठ उम्मीदवारों वाली सूची में संगठन के अनुभवी नेताओं से लेकर OBC, दलित और महिला चेहरों के साथ पेशेवर और ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को जगह दी गई है। राज्यसभा चुनाव महज संसद के उच्च सदन में सीटों का चुनाव नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है। भाजपा की कोशिश जहां अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखने की है, वहीं OBC, दलित, महिला और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के जरिए नए राजनीतिक समीकरणों को भी साधने की दिखाई दे रही है।