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लखनऊ में बाढ़ का कहर! गोमती का पानी घरों से लेकर प्लासियो मॉल तक पहुंचा, कई इलाकों से पलायन

लखनऊ में बाढ़ का कहर! गोमती का पानी घरों से लेकर प्लासियो मॉल तक पहुंचा, कई इलाकों से पलायन

लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। राजधानी के कई ऐसे इलाकों में भी नदी का पानी पहुंच गया है, जिन्हें अब तक अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था। फैजुल्लागंज, बीकेटी, इटौंजा और आसपास के कई क्षेत्रों में घरों और सड़कों पर पानी भरने से जनजीवन प्रभावित है। कई परिवार घरों पर ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। फैजुल्लागंज के कई इलाकों में करीब 20 से 25 फीसदी मकान खाली होने की बात सामने आई है।

बाढ़ का असर पॉश इलाकों तक भी पहुंच गया है। प्लासियो मॉल के आसपास गोमती का पानी नाले के रास्ते पहुंचने से सड़क पर जलभराव हो गया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की टीमें मौके पर पहुंचीं। जांच में सामने आया कि एक खुले नाले के जरिए नदी का पानी बैक फ्लो होकर मॉल की ओर आ रहा था। इसके बाद नाले को बंद कराया गया और पानी निकालने के लिए पंप लगाया गया। अधिकारियों के मुताबिक पानी का बहाव रोकने के बाद स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

एमार गोमती ग्रीन्स सोसाइटी के लिए भी बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बना हुआ है। सोसाइटी से करीब 100 मीटर दूर बने नाले तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। इसी के पास सोसाइटी का इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन मौजूद है। पानी सब-स्टेशन तक पहुंचने की स्थिति में पूरी सोसाइटी की बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। आरडब्ल्यूए ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, नगर निगम और बिजली विभाग से तत्काल निरीक्षण कर पंप, जनरेटर और राहत-बचाव उपकरण तैयार रखने की मांग की है।

सबसे ज्यादा परेशानी फैजुल्लागंज और इटौंजा क्षेत्र में दिखाई दे रही है। लोहरामऊ, श्याम सुंदर कॉलोनी, गोमती पुरम, गणेश विहार, मामा कॉलोनी, दाऊद नगर, दुर्गा कॉलोनी, पवन विहार और कृष्णा विहार समेत कई इलाकों में लोग पानी से घिरे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवारों को भोजन और पीने के पानी की परेशानी हो रही है। रात के समय निजी नावों के चलने से चोरी का डर भी बना हुआ है, जिसके कारण कई लोग रातभर घरों की निगरानी कर रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। जिलाधिकारी विशाख जी. और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने बरावन कला, सैथा और जेहटा समेत कई प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अधिकारियों ने घुटनों तक भरे पानी में उतरकर और नाव के जरिए हालात का जायजा लिया। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में 10 अतिरिक्त नावों की व्यवस्था करने और रात में पुलिस गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम बनाने की भी व्यवस्था की गई है।

दुबग्गा क्षेत्र के लालजी टंडन वार्ड के सैथा, जेहटा और हियात नगर के आसपास भी कई गांव जलभराव की चपेट में हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्य शुरू कराया। वहीं इटौंजा में राहत सामग्री बांटने पहुंचे विधायक योगेश शुक्ला की गाड़ी को ग्रामीणों ने रोक लिया। ग्रामीणों ने दुघरा और अकड़रिया के लिए मोटरबोट, भोजन और राशन की मांग की। इस दौरान हंगामे की स्थिति बन गई। बाद में एसडीएम बीकेटी ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया।

फैजुल्लागंज के पवन विहार में राहत और बचाव को लेकर लोगों की नाराजगी भी सामने आई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि एक महिला के साथ करीब एक घंटे तक नाव का इंतजार किया गया, लेकिन नाव नहीं पहुंची। शिकायत के बाद मौके पर पहुंची पुलिस के साथ लोगों की नोकझोंक भी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि राहत सामग्री कई जगह राहत केंद्रों तक ही सीमित रह जा रही है, जबकि पानी से घिरे परिवारों तक भोजन और पेयजल पहुंचाने की जरूरत है।

जलभराव के कारण बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। फैजुल्लागंज और दाऊद नगर में पानी भरने के बाद सुरक्षा के लिहाज से 11 ट्रांसफार्मरों की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। इनमें लोहरामऊ, नीलकंठ मंदिर, जैन कॉलोनी, मामा कॉलोनी चौराहा, कनौजिया चौराहा, शिल्पी स्कूल और होरी लाल मंदिर समेत कई स्थानों के ट्रांसफार्मर शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक पानी कम होने और स्थिति सुरक्षित होने के बाद ही बिजली आपूर्ति सामान्य की जाएगी। दाऊद नगर उपकेंद्र की बाउंड्री तक भी पानी पहुंच गया है।

बाढ़ का असर लखनऊ रिवरफ्रंट पर भी दिखाई दे रहा है। लगातार कई दिनों से जलभराव के कारण हजारों पेड़-पौधे पानी में डूबे हुए हैं, जिससे उनके खराब होने की स्थिति पैदा हो गई है। गोमती में प्रस्तावित क्रूज के निर्माण के लिए रबर डैम के पास और न्यू हैदराबाद के सामने रखा निर्माण सामान भी पानी की चपेट में आ गया है। जलभराव के कारण दोनों स्थानों पर निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। रिवरफ्रंट क्षेत्र में बंधे और अन्य विकास कार्य भी प्रभावित हुए हैं।

लामार्ट की ओर बन रहे ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण पर भी बाढ़ का असर पड़ा है। निर्माण स्थल पर पानी भरने से बिल्डिंग मटेरियल और अन्य सामान डूब गया है। कुछ सामग्री पानी के साथ बहने की भी जानकारी सामने आई है। इससे निर्माण कार्य की गति प्रभावित हुई है और नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

मलिहाबाद के शीतलनटोला स्थित मां शीतला देवी मंदिर परिसर में भी बेहता नदी और आसपास के नालों का गंदा पानी भर गया है। श्रद्धालुओं को पानी से होकर मंदिर पहुंचना पड़ रहा है। मंदिर समिति ने प्रशासन से परिसर से पानी निकालने की मांग की है। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और भंडारे में लोग पहुंचते हैं, ऐसे में जलभराव ने चिंता बढ़ा दी है।

बाढ़ का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। फैजुल्लागंज और आसपास के कई स्कूलों में जलभराव के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई है। कई बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं और कुछ विद्यार्थियों को टेस्ट व परीक्षाएं तक छोड़नी पड़ी हैं। जगलाल पेट्रोल पंप के आगे स्थित प्राथमिक विद्यालय समेत कई निजी स्कूलों में भी ताले लटक गए हैं।

लगातार बढ़ते पानी के बीच स्थानीय लोग अपने स्तर पर भी घरों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। कई परिवारों ने घरों के मुख्य गेट के सामने ईंटों की छोटी दीवारें खड़ी कर दी हैं, ताकि बाहर का गंदा पानी घर के अंदर न पहुंच सके। हालांकि पानी का स्तर बढ़ने के साथ ये इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।

फैजुल्लागंज में बाढ़ की स्थिति ने बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। दाऊद नगर, मिलनतनगर, रामनगर, गणेश विहार और मामा कॉलोनी समेत कई इलाकों से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। फिलहाल प्रशासन राहत और बचाव अभियान के साथ स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से राजधानी के कई इलाकों में खतरा अभी टला नहीं है।

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