
अयोध्या में 10वें दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या जरूर आएं, लेकिन आने से पहले माफी मांगकर आएं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या में कारसेवकों पर हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए सपा पर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज की अयोध्या त्रेतायुग का स्मरण करा रही है और रामनगरी एक बार फिर जीवंत होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि श्रीराम भारत के आत्मसम्मान के प्रतीक हैं। अयोध्या अपने उस गौरव को दोबारा हासिल कर रही है, जिसके लिए कारसेवकों और संतों ने बलिदान दिया था।
सीएम योगी ने पिछली सरकारों के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां और लाठियां चलाई जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अयोध्या में आने और जय श्रीराम बोलने तक पर अंकुश लगाने की कोशिश होती थी।
अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वे लोग भी भगवान राम के अस्तित्व को स्वीकार कर रहे हैं, जो कभी राम के खिलाफ वकीलों की फौज खड़ी करते थे। योगी ने इसे अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री ने धार्मिक कथाओं की मर्यादा का मुद्दा उठाते हुए भी अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जब कथाओं में जाते हैं तो उन्हें कथा की मर्यादा का भी ध्यान नहीं रहता और वे उसे मुशायरा समझ लेते हैं। योगी ने कहा कि कथाओं की अपनी पवित्र परंपरा और मर्यादा होती है, लेकिन कुछ लोग अपनी प्रवृत्ति के कारण राम की मर्यादा और कथा की पवित्रता को ध्यान में नहीं रखते।
दीपोत्सव के मंच से दिए गए मुख्यमंत्री के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या में कारसेवकों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।



