
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष को घेरने और जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रदेशव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। 3 नवंबर से 5 नवंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय अभियान के तहत प्रदेश के सभी छह प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत पार्टी के कई बड़े नेता शामिल होंगे। भाजपा इस अभियान के जरिए वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि पदयात्राओं के माध्यम से कार्यकर्ता सीधे जनता तक पहुंचेंगे और विपक्ष की ओर से बनाए जा रहे राजनीतिक नैरेटिव का जवाब देंगे।
अभियान के पहले दिन यानी 3 नवंबर को राजधानी लखनऊ और बरेली में प्रमुख पदयात्राएं आयोजित की जा रही हैं। लखनऊ में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। वहीं बरेली में पूर्व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पदयात्रा की कमान संभालेंगे। पार्टी को इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी की उम्मीद है।
अभियान के दूसरे दिन 4 नवंबर को गोरखपुर, प्रयागराज और कानपुर में भाजपा अपनी ताकत दिखाएगी। गोरखपुर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पदयात्रा में शामिल होंगे। इसी दिन प्रयागराज में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कानपुर में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भाजपा क्षेत्रीय स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने की कोशिश करेगी।
तीन दिवसीय अभियान का समापन 5 नवंबर को गाजियाबाद में होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस महत्वपूर्ण जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। समापन कार्यक्रम में पश्चिमी क्षेत्र के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी रहेगी। भाजपा पदाधिकारियों का मानना है कि इस अभियान से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए नई ऊर्जा मिलेगी। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में भाजपा की ये पदयात्राएं केवल जनसंपर्क अभियान नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हैं। अब देखना होगा कि तीन दिनों तक चलने वाला यह अभियान जनता के बीच कितना प्रभाव छोड़ता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने में भाजपा कितनी सफल रहती है।



