
उत्तर प्रदेश में दिवाली से पहले प्रदेश की 762 नगरीय निकायों को विकास और नागरिक सुविधाओं के लिए 1,201.64 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की गई है। पांचवें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत इस राशि से नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में सड़क, सीवर, खड़ंजे सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम कराए जाएंगे। हालांकि, इस धनराशि से सबसे पहले निकायों के कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन और बकाया भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्थानीय निकाय निदेशालय के निदेशक अनुज कुमार झा के अनुसार, जारी की गई राशि में नगर निगमों को 531.78 करोड़ रुपये, नगर पालिका परिषदों को 427.05 करोड़ रुपये और नगर पंचायतों को 242.81 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश की 545 नगर पंचायतों को मिली इस धनराशि का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर जरूरी नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
निदेशालय ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिया है कि धनराशि प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों के वेतन और अन्य देयकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसमें कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान को भी प्राथमिकता दी गई है। वेतन और अन्य जरूरी देयकों का भुगतान करने के बाद बची हुई धनराशि को विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकेगा।
इस राशि से शहरों और कस्बों में सड़क निर्माण, सीवर व्यवस्था, खड़ंजे और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही निकायों को खर्च की गई धनराशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र भी निर्धारित व्यवस्था के तहत जमा करना होगा, ताकि आवंटित बजट के इस्तेमाल का हिसाब रखा जा सके।
जारी सूची के मुताबिक, लखनऊ नगर निगम को 81.62 करोड़ रुपये मिले हैं, जो नगर निगमों में सर्वाधिक राशि है। वहीं नगर पंचायतों में बख्शी का तालाब को 1.19 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। दिवाली से पहले जारी इस बजट से नगरीय निकायों में कर्मचारियों के भुगतान के साथ स्थानीय विकास कार्यों को भी गति मिलने की उम्मीद है।



