मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
‘पैसे मांगे तो जेल में सड़ना पड़ेगा’, शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देते समय CM योगी की सख्त चेतावनी क्या दूसरे राज्यों में भी दिख रहा योगी मॉडल? बिहार के जमुई कांड से कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल योगी सरकार का जॉब कैलेंडर ऑन! 4 दिन में 5,297 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी CM योगी देंगे 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र, स्वास्थ्य से आयुष तक इन पदों पर मिलेगी नौकरी अमित शाह करेंगे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन, 25 सितंबर से शुरू होगा बड़ा आयोजन ‘बंदूक की राजनीति अब नहीं चलेगी’, मेरठ में सीएम योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला मेरठ में नितिन नवीन का सपा-कांग्रेस पर हमला, बोले- यूपी को फिर बांटने की कोशिश हो रही ‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’, दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश यादव पर तीखा हमला यूपी में 2027 से पहले पोस्टर वार तेज, अखिलेश यादव के खिलाफ लगे ‘आजम-अतीक-मुख्तार’ वाले पोस्टर 2027 से पहले बड़ा सवाल: उत्तर प्रदेश के लिए योगी मॉडल कितना जरूरी? कानून-व्यवस्था, रोजगार, महिला सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिपोर्ट

CBSE स्कूलों में लगेगा शुगर चेकिंग बोर्ड, एम्स के विशेषज्ञ ने बताया कारण

CBSE स्कूलों में लगेगा शुगर चेकिंग बोर्ड, एम्स के विशेषज्ञ ने बताया कारण

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने अधीनस्थ सभी स्कूलों को एक अहम निर्देश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि बच्चों के बढ़ते शुगर सेवन पर नियंत्रण रखने के लिए स्कूल परिसर में “शुगर बोर्ड” लगाए जाएं। यह कदम बच्चों में तेजी से बढ़ रहे टाइप-2 डायबिटीज के मामलों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। बोर्ड का कहना है कि यह समस्या पहले वयस्कों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह छोटे बच्चों में भी पाई जा रही है।

दिल्ली स्थित एम्स की प्रोफेसर और मीडिया व एनाटॉमी विभाग की प्रभारी डॉ. रीमा दादा ने इस निर्देश की सराहना करते हुए कहा कि यह एक बहुत ही जरूरी और समयानुकूल पहल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में 10 वर्ष की उम्र के बच्चों में भी हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां देखी जा रही हैं, जिसका मुख्य कारण असंतुलित और अस्वास्थ्यकर खानपान है।

डॉ. रीमा ने बताया कि बच्चों के दैनिक कैलोरी सेवन में शक्कर का हिस्सा 5% से ज्यादा नहीं होना चाहिए, लेकिन अब यह आंकड़ा 15% तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि न तो बच्चों को और न ही उनके अभिभावकों को इस खतरे की सही जानकारी होती है, ऐसे में सीबीएसई का यह निर्देश काफी सराहनीय है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल कैंटीनों में हेल्दी फूड ऑप्शन्स जरूर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उनके अनुसार, स्वस्थ खानपान न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।

सीबीएसई ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में 4 से 10 साल के बच्चों की कैलोरी डाइट में शुगर की मात्रा औसतन 13% और 11 से 18 साल के किशोरों में यह लगभग 15% तक पहुंच गई है, जबकि वैज्ञानिक मानकों के अनुसार यह 5% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह अधिक सेवन मुख्यतः स्कूलों के आस-पास मिलने वाले मीठे स्नैक्स, शुगरी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड की वजह से हो रहा है।

गौरतलब है कि यह निर्देश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के सुझाव के बाद जारी किया गया है। सीबीएसई ने सभी स्कूलों को 15 जुलाई तक अपने कैंपस में “शुगर बोर्ड” लगाने का आदेश दिया है ताकि छात्र-छात्राएं और अभिभावक इस विषय में जागरूक हो सकें।

Share
अगला लेख → गर्मियों में पसीने की बदबू से बचना चाहते हैं? तो अपनाएं ये ज…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *