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UK Immigration Changes: ब्रिटेन का बड़ा प्लान, भारतीय स्टूडेंट्स और वर्कर्स को मिल सकती है राहत

ब्रिटेन में पढ़ाई और नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। ब्रिटिश सरकार इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है। 2026 के बजट में प्रस्तावित इन बदलावों का मकसद देश की आर्थिक वृद्धि को गति देना और अलग-अलग क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की कमी को दूर करना है। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो भारतीय प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स और ब्रिटेन में काम करने वाले लोगों को इसका फायदा मिल सकता है।

ब्रिटेन लंबे समय से भारतीय छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन रहा है। यहां बड़ी संख्या में भारतीय उच्च शिक्षा हासिल करने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में काम भी कर रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय में इमिग्रेशन नियमों में हुए बदलावों ने भारतीयों की चिंता बढ़ाई थी। खासकर वीजा की अवधि और ब्रिटेन में लंबे समय तक रहने से जुड़े नियमों को लेकर कई लोगों के सामने चुनौतियां आईं।

अब सरकार की नई योजना से इन चिंताओं में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्किल वर्कर्स की सैलरी लिमिट में बदलाव का प्रस्ताव

प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम स्किल्ड वर्कर वीजा के लिए सैलरी लिमिट से जुड़ा है। सरकार जॉब के हिसाब से न्यूनतम वेतन की सीमा को 25वें पर्सेंटाइल पर वापस लाने की योजना बना रही है। इससे कुछ क्षेत्रों में कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करना आसान हो सकता है। भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए भी ब्रिटेन में नौकरी के अवसर बढ़ने की संभावना है।

HPI वीजा का होगा विस्तार

ब्रिटेन सरकार ‘हाई पोटेंशियल इंडिविजुअल’ (HPI) वीजा रूट का विस्तार करने की तैयारी में है। इस वीजा का उद्देश्य दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से पढ़ाई करने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को ब्रिटेन में काम करने और करियर बनाने का अवसर देना है। इसके विस्तार से योग्य भारतीय युवाओं के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।

ग्रेजुएट वीजा पर भी राहत

विदेशी छात्रों के लिए ग्रेजुएट वीजा को लेकर भी अहम प्रस्ताव सामने आया है। इसके तहत दो साल की ग्रेजुएट वीजा अवधि बरकरार रखने की बात कही गई है। इससे ब्रिटेन में पढ़ाई पूरी करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को नौकरी तलाशने और अपने करियर की शुरुआत करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।

इसके अलावा, कुछ हाई-स्किल स्पॉन्सर्ड कर्मचारियों को नौकरी या स्पॉन्सरशिप बदलने की स्थिति में ब्रिटेन में रहने के लिए अधिक समय देने का प्रस्ताव भी है। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी नौकरी या मौजूदा स्पॉन्सरशिप में बदलाव होता है।

आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार की नई रणनीति

ब्रिटेन सरकार ऐसे समय में इमिग्रेशन नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है, जब देश आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। आर्थिक विकास के अनुमान घटने, कर्ज लेने की लागत बढ़ने, निवेश की सीमित संभावनाओं और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

ऐसे में सरकार सार्वजनिक खर्च बढ़ाए बिना निजी निवेश और उत्पादकता को बढ़ावा देना चाहती है। कुशल विदेशी कर्मचारियों को आकर्षित करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, ब्रिटेन की प्रस्तावित इमिग्रेशन नीति भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि, इन बदलावों को लेकर अंतिम नियम और उनके लागू होने की तारीख स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि भारतीयों को कितनी राहत मिलेगी। फिलहाल ब्रिटेन में पढ़ाई या नौकरी की योजना बना रहे भारतीयों की नजर सरकार के अगले फैसलों पर रहेगी।

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