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गंगा को दूषित करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई – सी.आर. पाटिल

गंगा को दूषित करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई – सी.आर. पाटिल

बुलंदशहर- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में विश्व पर्यावरण दिवस 2025 के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने की। यह कार्यक्रम ‘नमामि गंगे’ मिशन के तहत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के सतत विकास, नदी पुनरुद्धार, स्वच्छ पर्यावरण और युवा सहभागिता के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम की शुरुआत एक जीवंत वृक्षारोपण अभियान से हुई, जिसमें जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

अपने संबोधन में जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि हमारी संस्कृति में हर नदी को ‘मां’ कहा गया है। ऐसे में उनका संरक्षण सिर्फ एक दायित्व नहीं, बल्कि एक श्रद्धा है। श्री पाटिल ने नदियों में फैल रहे प्लास्टिक प्रदूषण को समय की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि हमें प्रदूषण के स्रोत पर ही रोक लगानी होगी। प्लास्टिक के उपयोग को ख़त्म करना होगा और जनजागरूकता फैलानी होगी। जब तक हम यह नहीं समझेंगे कि गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति है — तब तक संरक्षण अधूरा रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में शुरू की गई नमामि गंगे योजना की सराहना की। उन्होंने बताया कि आज गंगा बेसिन के हर कोने में गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए एसटीपी लगाए गए हैं, जिससे गंगा में सीधे प्रदूषण का प्रवाह रोका गया है। गंगा प्रहरियों से मिलने के अनुभव को साझा करते हुए श्री पाटिल ने कहा कि ये प्रहरी न सिर्फ स्वयं गंगा की सफाई करते हैं, बल्कि दूसरों को प्रदूषण फैलाने से रोकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि गंगा में गंदा पानी न पहुंचे और जो भी गंगा को प्रदूषित करे, उस पर कड़ी कार्रवाई हो।

कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने नरौरा में गंगा एक्वा लाइफ रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। यह केंद्र गांगेय डॉल्फिन, ताजे पानी के कछुओं और अन्य जलीय प्रजातियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है। मंत्री जी ने केंद्र में आयोजित एक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया, जिसे भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा संचालित किया गया था। इस दौरान उन्होंने शोधकर्ताओं के साथ संवाद करते हुए, नदी पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक ज्ञान और स्थानीय सहभागिता की महत्ता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान जल शक्ति मंत्री ने 200 से अधिक गंगा प्रहरी, स्कूल छात्र और एमएससी छात्राओं के साथ संवाद किया। इन युवाओं ने पर्यावरणीय अनुकूल प्रथाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को साझा किया। साथ ही, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (NRCD) की रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया

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