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लखनऊ की हवा में जहर, 6.5 साल घटी उम्र, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रैंकिंग 4वें से 15वें पर पहुंची l

लखनऊ की हवा में जहर, 6.5 साल घटी उम्र, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रैंकिंग 4वें से 15वें पर पहुंची l

राजधानी लखनऊ की हवा की गुणवत्ता में काफी गिरावट आई है और हालिया स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में शहर की रैंकिंग 4वें स्थान से नीचे गिरकर 15वें स्थान पर आ गई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले 47 शहरों में लखनऊ को इस बार कुल 179 अंक मिले, जो पिछले साल के 189 अंकों से 10 अंक कम हैं।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ की खराब रैंकिंग का सीधा असर शहरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार हवा में प्रदूषण के कारण लखनऊवासी की औसत उम्र 6.5 साल तक घट गई है। इस प्रदूषण में बढ़ोतरी के पीछे वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की कमी और सड़क धूल शामिल हैं।

नगर निगम के पर्यावरण अधिकारी संजीव प्रधान ने बताया कि नगर निगम ने कुछ प्रयास किए हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आरटीओ, ग्रीन गैस और अन्य विभागों की लापरवाही से अंक कट गए हैं। पिछले वर्षों की तुलना में लखनऊ की पर्यावरणीय स्थिति पर निगरानी और नियंत्रण में कमी आई है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत किया जाता है। इसमें शहरों का आकलन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क धूल प्रबंधन, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के मानकों के आधार पर होता है।

इस गिरावट के बावजूद, लखनऊ अभी भी स्वच्छता के मामले में अच्छा प्रदर्शन करता रहा है, जहां स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में तीसरे स्थान पर पहुंचा था। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संबंधित विभागों ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए उचित कदम उठाए तो लखनऊ फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर सकता है।

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