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विश्व हेपेटाइटिस दिवस: रीजेंसी हेल्थ लखनऊ ने मॉनसून के दौरान लीवर की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का किया आह्वान

हॉस्पिटल ने पानी से होने वाले लीवर संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए हेपेटाइटिस के लक्षणों की जल्द पहचान, सुरक्षित खान-पान और समय पर इलाज कराने की सलाह दी है।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस: रीजेंसी हेल्थ लखनऊ ने मॉनसून के दौरान लीवर की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का किया आह्वान

लखनऊ , 27 जुलाई 2026: विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर लखनऊ के रीजेंसी हेल्थ ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित खान-पान और स्वच्छ पानी की आदतों को अपनाकर और वायरल हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर लीवर की सेहत को प्राथमिकता दें। मॉनसून के दौरान हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E जैसे पानी से फैलने वाले संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस कारण हॉस्पिटल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ज़्यादा जागरूकता, समय पर बीमारी का पता लगाने और बचाव वाली हेल्थकेयर से हेपेटाइटिस के ऐसे संक्रमणों का बोझ काफी कम किया जा सकता है। साथ ही इससे लीवर की सेहत को, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों और कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों के मामले में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

इस अवसर पर बोले हुए रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी के एसोसिएट डॉयरेक्टर डॉ प्रवीण झा ने कहा, “बहुत से लोग सोचते हैं कि हेपेटाइटिस से सिर्फ़ पीलिया होता है, लेकिन अक्सर इसकी शुरुआत बुखार, थकान, जी मिचलाना, उल्टी और भूख न लगने जैसे आम लक्षणों से होती है। अक्सर इन लक्षणों को मौसमी बीमारी समझ लिया जाता है।

मॉनसून के दौरान दूषित खाना और पीने का पानी हेपेटाइटिस A और E संक्रमण के मुख्य कारण होते हैं। लक्षणों की जल्द पहचान, सुरक्षित खाना और साफ़ पीने का पानी, और समय पर इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है, खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से लीवर की बीमारी से जूझ रहे लोगों में जल्दी पहचान और इलाज बहुत जरूरी होता है। मानसून के दौरान दूषित खाने और पानी से हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E के फैलने का ज्यादा खतरा होता है। इसलिए इन संक्रमणों से बचाव और जागरूकता बहुत ज़रूरी है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में लगभग 304 मिलियन लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C से पीड़ित थे। यह आँकड़ा वायरल हेपेटाइटिस के बढ़ते वैश्विक बोझ को दिखाता है। भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (NVHCP) का अनुमान है कि लगभग 40 मिलियन लोग हेपेटाइटिस B और 6 से 12 मिलियन लोग हेपेटाइटिस C से पीड़ित हैं। इस कारण इन संक्रमणों के प्रति ज़्यादा जागरूकता, समय पर जांच, टीकाकरण और बचाव वाली स्वास्थ्य सेवा की ज़रूरत का पता चलता है।

हॉस्पिटल ने लोगों को सलाह दी है कि वे लगातार बुखार, थकान, जी मिचलाना, उल्टी, पेट में बेचैनी, भूख न लगना, गहरे रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल और आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया) जैसे लक्षणों के प्रति सतर्क रहें। जिन लोगों को ये लक्षण दिखें, उन्हें खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए, क्योंकि बीमारी का जल्दी पता चलने और समय पर इलाज होने से ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और लीवर से कोई भी समस्या होने का खतरा कम हो जाता है। अपने जागरूकता अभियान के तहत रीजेंसी हेल्थ ने लोगों को सलाह दी कि वे सिर्फ़ उबला हुआ, फ़िल्टर किया हुआ या पैक हुआ पानी ही पिएं, साफ़-सफ़ाई न रखने वाली जगहों का खाना न खाएं, खाना खाने और टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद साबुन से हाथ धोएं, फल और सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोएं, और साफ़-सफ़ाई व सुरक्षित तरीके से खाना संभालने के नियमों का पालन करें।

हॉस्पिटल ने ज़्यादा जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर से सलाह लेने के बाद हेपेटाइटिस A का टीका लगवाने की भी सलाह दी। साथ ही यह भी बताया गया कि हेपेटाइटिस A और E दूषित खाने और पानी से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस B और C संक्रमित खून और शरीर के तरल पदार्थों से फैलते हैं। हेपेटाइटिस B का टीका लगवाने, सुरक्षित मेडिकल तरीकों को अपनाने, ज़्यादा जोखिम वाले लोगों की नियमित जांच और समय पर इलाज से लीवर की गंभीर बीमारी का ख़तरा कम किया जा सकता है।

जनता के स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए रीजेंसी हेल्थ मरीज़ों को जागरूक करके, बचाव के उपाय अपनाकर, एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सर्विस देकर और लीवर की बीमारियों का पूरा इलाज करके लीवर की सेहत को बेहतर बनाने का प्रयास जारी रखे हुए है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर हॉस्पिटल ने लोगों, परिवारों, स्कूलों और कम्युनिटी संगठनों से अपील की कि वे सुरक्षित पीने का पानी, अच्छी साफ़-सफ़ाई, समय पर मेडिकल देखभाल और ज़्यादा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करें। इन प्रयासों से हेपेटाइटिस संक्रमण को रोकने और लंबे समय तक लीवर की सेहत को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

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