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भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से तबला वादन में डॉ. विकास अवस्थी को पीएच.डी., पूरब बाज पर शोध को मिली शैक्षणिक मान्यता

लखनऊ, 17 जुलाई। भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए गौरव का विषय है कि डॉ. विकास अवस्थी को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा तबला वादन विषय में पीएच.डी. की प्रतिष्ठित उपाधि प्रदान की गई है। उनका शोध विषय “तबले में विस्तारशील एवं अविस्तारशील रचनाओं की तुलना : पूरब बाज के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” भारतीय तबला परंपरा, विशेषकर पूरब बाज की शैली और उसकी रचनात्मक संरचना पर आधारित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अध्ययन माना जा रहा है।

डॉ. अवस्थी का यह शोध भारतीय शास्त्रीय संगीत के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कलाकारों और अध्यापकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में स्थापित होने की क्षमता रखता है। इसमें तबले की विस्तारशील एवं अविस्तारशील रचनाओं का तुलनात्मक और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है, जो पारंपरिक तबला शैली के संरक्षण के साथ-साथ उसके शैक्षणिक विकास और नवाचार के नए आयाम खोलता है।

यह उपलब्धि केवल एक अकादमिक सफलता नहीं, बल्कि समर्पण, अनुशासन, पारिवारिक मूल्यों और राजकीय सेवा के बीच उत्कृष्ट संतुलन का उदाहरण भी है। पीएच.डी. की कठिन शोध यात्रा के दौरान डॉ. अवस्थी ने उत्तर प्रदेश विधान सभा में अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और दक्षता के साथ किया। साथ ही, उन्होंने अपनी पुत्री अद्रिका के पालन-पोषण और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समय-प्रबंधन से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

डॉ. अवस्थी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी धर्मपत्नी श्रीमती अम्बिका अवस्थी, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीतापुर, के धैर्य, नैतिक सहयोग और निरंतर प्रेरणा को दिया है। उन्होंने अपनी श्रद्धेय माताजी के संस्कारों और आशीर्वाद को भी इस उपलब्धि की आधारशिला बताया।

संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध भविष्य में तबला शिक्षण-सामग्री के विकास, शोध कार्यों के विस्तार और भारतीय ताल परंपरा के दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय संगीत और तबला परंपरा की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।

डॉ. विकास अवस्थी की यह उपलब्धि संगीत-जगत के लिए प्रेरणादायी मानी जा रही है। यह संदेश देती है कि गुरु-मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग, आध्यात्मिक आस्था और कठोर परिश्रम के समन्वय से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनका शोध भारतीय तबला परंपरा में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक योगदान के रूप में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।

भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से तबला वादन में डॉ. विकास अवस्थी को पीएच.डी., पूरब बाज पर शोध को मिली शैक्षणिक मान्यता

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