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आजम के करीबियों की बढ़ीं मुश्किलें! जौहर यूनिवर्सिटी केस में ED की एंट्री

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रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान ट्रस्ट को दान के रूप में बड़ी रकम देने वाले लोगों की जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब उन लोगों की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिनके खातों से लाखों या करोड़ों रुपये ट्रस्ट में जमा किए गए थे।

मामला सिर्फ विश्वविद्यालय की संपत्ति या ट्रस्ट की गतिविधियों तक सीमित नहीं है। जौहर ट्रस्ट के जरिए विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़ी वित्तीय गतिविधियों में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। साल 2019 में तत्कालीन रामपुर शहर विधायक और बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने इस मामले को लेकर जांच एजेंसियों का दरवाजा खटखटाया था। शिकायत में ट्रस्ट और विश्वविद्यालय की वित्तीय गतिविधियों की जांच की मांग की गई थी।

आकाश सक्सेना की ओर से जांच एजेंसियों को जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़ी कई वित्तीय जानकारियां उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया था। शिकायत में आयकर विभाग की कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया था। आरोप लगाया गया था कि आजम खान से जुड़े मामलों में बड़ी वित्तीय देनदारी निर्धारित की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।

अब ED की मौजूदा कार्रवाई ने इस पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट में बड़ी रकम दान करने वाले लोग कौन थे और इन पैसों का स्रोत क्या था? अगर जांच के दौरान किसी लेन-देन में नियमों के उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं, तो एजेंसी संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुला सकती है।

फिलहाल ED की जांच जारी है और किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले जांच के निष्कर्ष और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार करना जरूरी है। आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह साफ हो सकता है कि जौहर ट्रस्ट में आने वाले बड़े चंदे का पूरा नेटवर्क क्या था और क्या इन लेन-देन का विश्वविद्यालय तथा आजम खान से जुड़े मामलों से कोई सीधा संबंध निकलता है। अब नजर ED की अगली कार्रवाई पर है।

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