क्यों भड़क उठी ईरान-US जंग में चिंगारी,क्या है वजह ?
मध्य-पूर्व में एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। करीब एक महीने की शांति के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि इन लॉन्चरों से रणनीतिक समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी की जा रही थी। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया।
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा संघर्ष की जड़ सिर्फ हालिया हमला नहीं है। इसके पीछे कई सालों से चला आ रहा परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय प्रभाव और दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास है।
2026 की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले शुरू किए थे। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने इन हमलों को ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोकने तथा क्षेत्र में सुरक्षा खतरों को कम करने के लिए जरूरी बताया था। इसके बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि ईरान की परमाणु क्षमता भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की दिशा में जा सकती है।
ईरान हालांकि लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। यही विवाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा रहा है।
2026 में दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कोशिशें भी हुईं, लेकिन तनाव कम नहीं हो सका और सैन्य टकराव दोबारा बढ़ गया। इस पूरे विवाद में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण जगह बन चुका है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस इलाके में समुद्री यातायात को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं ईरान अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और कार्रवाई को अपने खिलाफ आक्रामक कदम मानता है।
30 अगस्त को अमेरिका ने लारक द्वीप के पास ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक ये लॉन्चर समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में इस्तेमाल हो सकते थे। अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की वायु रक्षा ने कई मिसाइलों को रोकने का दावा किया है।
ईरान ने अमेरिकी हमले को उकसावे वाला कदम बताया और चेतावनी दी कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे आशंका बढ़ गई है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष फिर बड़े स्तर पर फैल सकता है।
इस नए तनाव का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।
ताजा तनाव के बाद तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
एक तरफ अमेरिका ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी मिसाइल क्षमता और रणनीतिक समुद्री स्थिति का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है। इसी बीच बातचीत और कूटनीति के रास्ते भी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
यानी ईरान-US संघर्ष की मौजूदा चिंगारी सिर्फ एक हमले की वजह से नहीं भड़की है। इसके पीछे परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, तेल और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण और वर्षों से चला आ रहा आपसी अविश्वास है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अगला कदम अमेरिका उठाता है या ईरान—और क्या दोनों देश एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटते हैं या मध्य-पूर्व एक और बड़े सैन्य टकराव की तरफ बढ़ता है।