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क्या अब UPI करने पर कटेंगे पैसे? ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर नए नियम की पूरी जानकारी

क्या अब UPI करने पर कटेंगे पैसे? ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर नए नियम की पूरी जानकारी

UPI Payment को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ सामान्य मर्चेंट यानी P2M UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR (Merchant Discount Rate) लागू होगा। हालांकि, इसका सीधा भुगतान आम ग्राहक से अलग से लेने का प्रावधान नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांसफर पहले की तरह MDR से बाहर रहेंगे। ऐसे में इस बदलाव का असर मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन और पेमेंट सिस्टम की फंडिंग पर पड़ेगा।

दरअसल, UPI का नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में बेहद तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही इसे संचालित करने, सुरक्षित रखने और लगातार अपग्रेड करने की लागत भी बढ़ी है। संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट के मुताबिक UPI सिस्टम की अनुमानित सालाना ऑपरेशनल लागत करीब ₹20,700 करोड़ है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में UPI और RuPay से जुड़े प्रोत्साहन के लिए करीब ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यानी अनुमानित खर्च और सरकारी प्रावधान के बीच काफी बड़ा अंतर है।

UPI को सिर्फ एक मोबाइल पेमेंट सुविधा के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे बैंकिंग नेटवर्क, सर्वर और पेमेंट प्रोसेसिंग के अलावा साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने की व्यवस्था और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार अपग्रेड करने का खर्च भी शामिल है। संसदीय समिति ने भी पर्याप्त फंडिंग की जरूरत पर जोर दिया है, क्योंकि फंड की कमी का असर साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले निवेश पर पड़ सकता है।

नए नियमों के तहत सामान्य मर्चेंट UPI पेमेंट में ₹2,000 से ज्यादा की रकम पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा। उदाहरण के तौर पर ₹5,000 के पेमेंट पर MDR ₹20 और ₹10,000 के पेमेंट पर ₹40 होगा। ₹50,000 के पेमेंट पर यह राशि ₹200 और ₹75,000 पर ₹300 होगी। इसके बाद अधिकतम सीमा लागू होगी। यानी ₹1 लाख के पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹400 बनता है, लेकिन अधिकतम ₹300 MDR ही लिया जाएगा। इसी तरह ₹2 लाख या ₹5 लाख के सामान्य ट्रांजेक्शन पर भी अधिकतम MDR ₹300 रहेगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा। UPI में मुख्य रूप से दो तरह के ट्रांजेक्शन होते हैं—P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति और P2M यानी व्यक्ति से मर्चेंट। P2P ट्रांसफर पर यह MDR लागू नहीं होगा। वहीं P2M ट्रांजेक्शन में भी छोटे भुगतान का बड़ा हिस्सा इस दायरे से बाहर रहेगा।

वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए कुल करीब 24,162 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹314 लाख करोड़ रही। ट्रांजेक्शन की संख्या के हिसाब से P2M की हिस्सेदारी करीब 63 प्रतिशत और P2P की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत रही। हालांकि कुल वैल्यू में P2P भुगतान की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार P2M ट्रांजेक्शन में करीब 86 प्रतिशत भुगतान ₹500 से कम के थे। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी का बड़ा हिस्सा नए MDR के दायरे में नहीं आएगा।

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR व्यवस्था रखी गई है। ₹2,000 से ज्यादा के कुछ बिल पेमेंट, रेलवे टिकट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी कैटेगरी में फ्लैट ₹5 MDR निर्धारित किया गया है। वहीं म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े कुछ भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR और अधिकतम ₹300 की सीमा रखी गई है।

छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी इस बदलाव से राहत देने की व्यवस्था की गई है। ₹1 लाख महीने तक QR के जरिए UPI पेमेंट लेने वाले छोटे मर्चेंट के लिए MDR से छूट जारी रहेगी। इससे स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त पेमेंट लागत का सीधा असर कम रखने की कोशिश की गई है। इसके अलावा कुल MDR कलेक्शन का 5 प्रतिशत छोटे कारोबारियों क

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