CM योगी बोले- सनातन धर्म भारत की मूल आस्था, अपनी पहचान को भूलना हमारी बड़ी भूल थी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सनातन धर्म भारत की मूल आस्था और देश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी कमी यह रही कि उसने एक समय अपनी परंपराओं और अपनी पहचान को भुला दिया। उनके मुताबिक, जब दुनिया के कई हिस्से अंधकार में थे, तब भारत की सभ्यता और संस्कृति समृद्ध और विकसित थी।
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या की गरिमा, काशी की आध्यात्मिक चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और प्रयागराज कुंभ की सामाजिक समरसता को समझे बिना उत्तर प्रदेश और भारत की पूरी पहचान को समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत को समझना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने गाय को सनातन परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि गोसेवा और गौ संरक्षण को लेकर समाज की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में भोजन का पहला हिस्सा गाय के लिए निकालने की बात कही गई है। इसी तरह अंतिम हिस्सा कुत्ते के लिए रखने की परंपरा का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि इन परंपराओं का पालन किया जाता, तो सड़कों पर आवारा पशुओं और कुत्तों से जुड़ी कई समस्याएं कम हो सकती थीं।
उन्होंने कहा कि धरती को माता के रूप में देखा जाता है और यदि पर्यावरण तथा धरती की रक्षा करनी है तो गोवंश के संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, राज्य सरकार अपने स्तर पर गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 7,000 से अधिक गोशालाओं में 16 लाख से ज्यादा गोवंश की देखभाल की जा रही है। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंश के पालन के लिए किसानों को प्रति पशु हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने लोगों से गोशालाओं से जुड़ने और गोवंश के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।
इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुशीनगर के तमकुहीराज क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। जिन परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जाएगी। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए भी आर्थिक मदद देने की बात कही गई।
योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को बाढ़ से हुए फसलों के नुकसान का सर्वे जल्द पूरा करने और प्रभावित किसानों को 10 दिनों के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राहत सामग्री भी वितरित की और अधिकारियों को जरूरत के अनुसार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित लोगों के लिए 5,000 खाद्य सामग्री के पैकेट तैयार किए गए हैं। इन पैकेटों में चावल, आटा और आलू के अलावा दाल, चना, तेल, मसाले, नमक और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार को सरकार की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और राहत शिविरों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लगातार चार दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी। नेपाल में हुई बारिश के कारण भी बड़ी मात्रा में पानी निचले इलाकों की ओर आया। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में नारायणी नदी में करीब 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी बहता है, लेकिन अचानक यह बढ़कर करीब 5.5 लाख क्यूसेक हो गया। पानी के इस तेज बहाव के कारण तटबंध प्रभावित हुआ और कई घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सोमवार से ही स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मौसम में अब सुधार आया है।