11 साल की उम्र में खोए माता-पिता, अब एशियन गेम्स में अमन सहरावत ने जीता गोल्ड
एशियन गेम्स 2026 में भारत के स्टार पहलवान अमन सहरावत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में गोल्ड मेडल जीत लिया। 14वें दिन हुए रोमांचक फाइनल मुकाबले में अमन ने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन उत्तर कोरिया के हान चोंग-सोंग को 11-7 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत के खाते में एशियन गेम्स 2026 का 20वां गोल्ड मेडल भी जुड़ गया।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत बेहद कड़ी टक्कर के साथ हुई। दोनों पहलवान एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन अमन ने अपनी फुर्ती दिखाते हुए पहला अंक हासिल किया। इसके बाद उन्होंने आक्रामक खेल जारी रखा और एक समय स्कोर 6-1 तक पहुंचा दिया। हालांकि, मुकाबले के दौरान इंजरी ब्रेक के बाद हान चोंग-सोंग ने जोरदार वापसी की और लगातार दांव लगाकर अमन पर दबाव बना दिया।
मुकाबला अपने अंतिम दौर में पहुंचा तो उत्तर कोरियाई पहलवान ने अमन को पिन करते हुए स्कोर में वापसी कर ली। उस समय मुकाबला बेहद रोमांचक हो चुका था और जीत किसी के भी पक्ष में जा सकती थी। लेकिन जब एक मिनट से भी कम समय बचा था, तब अमन सहरावत ने धैर्य और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को मैट पर लॉक करते हुए महत्वपूर्ण अंक हासिल किए और अंत में 11-7 से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया।
एशियन गेम्स में अमन का यह लगातार दूसरा पदक है। इससे पहले हांगझू एशियन गेम्स में उन्होंने इसी 57 किलोग्राम भार वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन को गोल्ड में बदल दिया है। मौजूदा एशियन गेम्स में फ्रीस्टाइल कुश्ती में यह भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है, जबकि कुश्ती में यह भारत का चौथा पदक बताया जा रहा है।
अमन सहरावत की इस सफलता के पीछे उनका संघर्ष भी उतना ही खास है। 16 जुलाई 2003 को हरियाणा के झज्जर जिले के बिरोहड़ गांव में जन्मे अमन ने बचपन में ही कुश्ती शुरू कर दी थी। साल 2012 के लंदन ओलंपिक में सुशील कुमार के सिल्वर मेडल से प्रभावित होकर अमन करीब 10 साल की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पहुंच गए थे।
अमन की जिंदगी में सबसे बड़ा झटका तब आया जब महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। इसके बाद उनके चाचा सुधीर और परिवार ने अमन और उनकी छोटी बहन पूजा की जिम्मेदारी संभाली। माता-पिता को खोने के बाद अमन को मानसिक तनाव और मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी ऊर्जा कुश्ती पर केंद्रित कर दी।
छत्रसाल स्टेडियम में कोच ललित कुमार के मार्गदर्शन में अमन ने कुश्ती के दांव-पेंच सीखे और धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। पेरिस ओलंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद अब एशियन गेम्स में गोल्ड हासिल करना उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।
अमन सहरावत की कहानी खेल के मैदान पर संघर्ष, मेहनत और वापसी की मिसाल के तौर पर सामने आई है। बचपन के व्यक्तिगत संघर्षों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने तक का उनका सफर उन्हें देश के प्रमुख युवा पहलवानों में शामिल करता है।