बस ड्राइवर के बेटे ने टीम इंडिया के नेट्स में मचाई सनसनी, संजू सैमसन भी हुए प्रभावित
भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 मुकाबले से पहले रांची में भारतीय टीम के अभ्यास सत्र के दौरान एक युवा तेज गेंदबाज ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 24 वर्षीय राजनदीप सिंह ने नेट्स में अपनी सटीक लाइन-लेंथ और धारदार गेंदबाजी से ईशान किशन, संजू सैमसन, तिलक वर्मा और 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों को खूब परेशान किया। उनकी गेंदबाजी से प्रभावित होकर भारतीय खिलाड़ियों ने उनकी तारीफ की। इस दौरान विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन से मिली शाबाशी राजनदीप के लिए खास पल रही।
रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में भारतीय टीम के अभ्यास सत्र के दौरान राजनदीप को देश के बड़े बल्लेबाजों के सामने गेंदबाजी करने का मौका मिला। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ गेंदबाजी की और कई बार बल्लेबाजों को चकमा देते हुए उनके बल्ले का बाहरी किनारा निकलवाया। उनके लिए यह अनुभव किसी बड़े अवसर से कम नहीं था। राजनदीप ने बताया कि सीनियर खिलाड़ियों के सामने गेंदबाजी करने से उन्हें अपनी कमजोरियों को समझने और खेल में सुधार करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर गेंदबाजी करते समय जरा भी ढील नहीं दी जा सकती। संजू सैमसन और अन्य बल्लेबाजों ने भी उनकी गेंदबाजी की सराहना की।
राजनदीप सिंह की कहानी संघर्ष, मेहनत और अपने सपने पर भरोसा बनाए रखने की मिसाल है। उनके पिता कुलवंत सिंह पंजाब के जालंधर में स्कूल बस चलाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन राजनदीप ने क्रिकेट में करियर बनाने का सपना नहीं छोड़ा। क्रिकेट पर पूरा ध्यान लगाने के लिए उन्होंने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया। साल 2016 में जब परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, तब उनके सामने क्रिकेट छोड़ने तक की नौबत आ गई थी। हालांकि, उन्होंने परिवार से एक साल का समय मांगा और अपनी मेहनत के दम पर झारखंड की अंडर-16 टीम में जगह बना ली।
राजनदीप के संघर्ष का दौर यहीं खत्म नहीं हुआ। उनकी दादी के निधन और आर्थिक परेशानियों के कारण परिवार को वापस जालंधर लौटना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने क्रिकेट के सपने को पूरा करने के लिए झारखंड में ही रुकने का फैसला किया। मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने की दिशा में लगातार मेहनत की। आज उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो से तीन आईपीएल फ्रेंचाइजी उन्हें ट्रायल के लिए बुला चुकी हैं।
राजनदीप सिर्फ तेज गेंदबाजी में ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजी में भी अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। सीके नायडू ट्रॉफी में मेघालय के खिलाफ उन्होंने 387 गेंदों पर नाबाद 400 रन की शानदार पारी खेली थी। इस प्रदर्शन ने क्रिकेट से जुड़े लोगों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की तलाश करने वाले स्काउट्स का ध्यान उनकी ओर खींचा। एक ही खिलाड़ी का गेंद और बल्ले दोनों से प्रभावशाली प्रदर्शन करना उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
झारखंड की घरेलू क्रिकेट टीम में भी राजनदीप का योगदान अहम रहा है। वह ईशान किशन की कप्तानी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब जीतने वाली झारखंड टीम का हिस्सा थे। पंजाब के खिलाफ 235 रन के लक्ष्य वाले मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 30 रन देकर एक विकेट हासिल किया था। टूर्नामेंट में उन्होंने आठ मैचों में पांच विकेट लेने के साथ बल्लेबाजी में भी अच्छा प्रदर्शन किया। सात पारियों में 40 की औसत और 186 से अधिक के स्ट्राइक रेट से उनके बल्ले से 200 रन निकले। इसके अलावा झारखंड प्रीमियर लीग में भी उन्होंने आठ मैचों में आठ विकेट हासिल किए।
राजनदीप सिंह अपने क्रिकेट करियर में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं। उनका कहना है कि मैदान पर दबाव की परिस्थितियों को संभालने और खेल को समझने की कला वह धोनी से सीखना चाहते हैं। वहीं, झारखंड टीम के कप्तान ईशान किशन को वह अपना मार्गदर्शक मानते हैं।
रांची में भारतीय टीम के अभ्यास सत्र के दौरान मिली तारीफ राजनदीप के लिए आगे बढ़ने की एक और प्रेरणा है। स्कूल बस चलाने वाले पिता के बेटे से लेकर भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाजों के सामने गेंदबाजी करने तक का उनका सफर बताता है कि घरेलू क्रिकेट में प्रतिभा को निखारने के लिए निरंतर मेहनत और धैर्य कितना जरूरी है। अब आईपीएल फ्रेंचाइजी के ट्रायल के अवसरों के बीच राजनदीप की नजर अपने खेल को और बेहतर बनाने तथा बड़े स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने पर होगी।