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योगी का विपक्ष पर वार- 2017 से पहले था ‘रूल ऑफ माफिया’, अब ‘रूल ऑफ लॉ’

योगी का विपक्ष पर वार- 2017 से पहले था ‘रूल ऑफ माफिया’, अब ‘रूल ऑफ लॉ’

लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में माफिया का दबदबा था, जबकि उनकी सरकार ने ‘रूल ऑफ माफिया’ की जगह ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन लागू किया।

शनिवार को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के माफिया अतीक अहमद का नाम लिए बिना उस दौर की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब एक माफिया के सामने कानून और व्यवस्था का प्रभाव कमजोर पड़ जाता था। मुख्यमंत्री, राज्यपाल और न्यायाधीश जैसे संवैधानिक पद भी उसके लिए कोई मायने नहीं रखते थे।

सीएम योगी ने कहा कि उस समय माफिया का काफिला निकलने पर उसे पहले रास्ता दिया जाता था। वह जिस जमीन पर पैर रख देता था, उस पर अपना अधिकार समझने लगता था। मुख्यमंत्री ने कहा, “2017 के पहले यूपी में ‘रूल ऑफ माफिया’ था, लेकिन हमने कानून की किताब से उसे निकालकर ‘रूल ऑफ लॉ’ को ईमानदारी से लागू किया।” उनके इस बयान को प्रदेश में कानून-व्यवस्था में बदलाव के सरकार के दावे के तौर पर देखा जा रहा है।

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के इस दीक्षांत समारोह में न्यायपालिका और शिक्षा जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ जस्टिस विक्रम नाथ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली और उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

समारोह के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने हल्के-फुल्के अंदाज से भी लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे बिना लिखित भाषण पढ़े संबोधित करने के लिए कहा था, लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति ने लिखित भाषण पढ़ने का आग्रह किया। इस पर उन्होंने कहा, “इस बार मैं कुलपति की बात मान लेता हूं। अगली बार जब आऊंगा तो मुख्यमंत्री जी की बात मानकर बिना कागज देखे भाषण दूंगा।”

जस्टिस विक्रम नाथ की इस टिप्पणी से समारोह के औपचारिक माहौल में हल्कापन आया। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कानून के शासन को लेकर अपनी सरकार का पक्ष रखा, वहीं दूसरी ओर जस्टिस विक्रम नाथ की सहज टिप्पणी कार्यक्रम के यादगार पलों में शामिल रही।

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