
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तुष्टिकरण और संतुष्टीकरण की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब देश तुष्टिकरण के रास्ते पर चला, तब-तब आतंकवाद को बढ़ावा मिला। मुख्यमंत्री के मुताबिक, मौजूदा सरकार की नीति किसी एक वर्ग को विशेष लाभ देने की नहीं, बल्कि बिना भेदभाव हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। उन्होंने इसे संतुष्टीकरण की नीति बताते हुए कहा कि इसी से रामराज्य की परिकल्पना साकार हो रही है।
मुख्यमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और आस्था को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत में अनेक भाषाएं और बोलियां होने के बावजूद लोगों के भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव में एकता दिखाई देती है। इसके पीछे हजारों वर्षों की परंपरा और अटूट आस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने रामकथा और रामलीला की परंपरा का जिक्र करते हुए पंडित राधेश्याम की रामायण को भी इस सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा बताया।
राम मंदिर का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने अयोध्या में दो नवंबर की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह तारीख रामभक्तों की पुरानी पीड़ा से जुड़ी रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अब अयोध्या में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले जिस स्थान पर रामभक्तों पर गोलियां चलने की घटना हुई थी, आज वहां श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए जाते हैं।
आगामी दीपोत्सव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम के आगमन की खुशी में जलाया जाने वाला हर दीप विकास और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंदिरों में जाने का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि मन से नकारात्मकता को दूर करना भी है। उनके मुताबिक, आस्था और सकारात्मक सोच से समाज में एकता और संतुलन मजबूत होता है।
पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले सरकारी धन का बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार में बर्बाद होता था, जबकि अब इसका इस्तेमाल मंदिरों के जीर्णोद्धार, सड़कों के निर्माण और गरीबों को राशन उपलब्ध कराने जैसे कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यही रामराज्य की अवधारणा है, जिसमें जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाता है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद तुष्टिकरण, संतुष्टीकरण और रामराज्य की अवधारणा को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है। कार्यक्रम में उन्होंने आस्था, सांस्कृतिक विरासत, विकास और सुशासन को एक-दूसरे से जोड़ते हुए अपनी सरकार की नीतियों का पक्ष रखा।



