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चीन को आर्थिक झटका देने की तैयारी में मुख्यमंत्री योगी

चीन को आर्थिक झटका देने की तैयारी में मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर माटी कला बोर्ड ने गौरी-गणेश की चाइनीज मूर्तियों को बाजार से बाहर करने की पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए प्रदेश स्तरीय ऑनलाइन और वास्तविक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इनके माध्यम से मूर्तिकला के नामी-गिरामी मूर्तिकार और विशेषज्ञ, माटी में जान डालने वालों को अपना हुनर निखारने के लिए टिप्स देंगे। इस बार दिवाली में उत्तर प्रदेश और चीन का मूर्तियों के बाजार में जोरदार मुकाबला हो सकता है ।

मुख्यम्नत्री के निर्देश के बाद तैयारियां चल रही हैं। इसी महीने ऑनलाइन कार्यशाला भी आयोजित होने वाली है। इसमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट एंड डिजाइन (आईआईसीडी जयपुर), महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिकरण संस्थान (एमजीआईआरआई, वर्धा), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन एंड टेक्नोलॉजी (निट, रायबरेली) और उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज ऑफ डिजाइन (यूपीआईडी) के विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञ गुणवत्ता में बेहतर और दाम में प्रतिस्पर्धी गौरी-गणेश की मूर्तियों को बनाने की जानकारी देंगे।

प्रदेश स्तरीय वास्तविक कार्यशाला अगस्त में गोरखपुर में होगी। गोरखपुर के चयन के पीछे यहां के भटहट कस्बे के औरंगाबाद और आस-पास के गांवों के लोगों की मिट्टी के सामान (टेरोकोटा) बनाने में महारथ हासिल होना है। इन गांवों के करीब दर्जन भर से अधिक लोग अपने हुनर के लिए प्रदेश और देश स्तर पर सम्मानित भी हो चुके हैं। इनके हुनर के कारण ही टेरोकोटा गोरखपुर के एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल है। हाल ही में वहां के टेरोकोटा को जियोग्राफिकल इंडीकेशन (जीआई) भी प्राप्त हुआ।

प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग नवनीत सहगल ने कहा, ‘स्वदेशी को बढ़ावा देना मुख्यमंत्री की मंशा है। दिवाली में लगभग हर परिवार पूजन के लिए गौरी-गणेश की मूर्तियां खरीदता है। अधिकांश मूर्तियां चीन से आती हैं। चीन का एकाधिकार टूटे। हमारे यहां के माटी कला से जुड़े कलाकार भी गुणवत्ता में उसी तरह की या उससे बेहतर और दामों में प्रतिस्पर्धी मूर्तियां बना सकें, कार्यशाला का यही मकसद है।’

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