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25 साल की उम्र में क्यों बढ़ रही है बेचैनी? एंग्जाइटी और डिप्रेशन से बचाव के उपाय जानें

25 साल की उम्र में क्यों बढ़ रही है बेचैनी? एंग्जाइटी और डिप्रेशन से बचाव के उपाय जानें

आजकल युवाओं में तनाव और डिप्रेशन की समस्या बेहद बढ़ गई है, जो उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर देती है। इसका असर इस हद तक बढ़ गया है कि अब कम उम्र में ही युवा आत्महत्या जैसी गंभीर सोचों का शिकार होने लगे हैं। विशेष रूप से कामकाजी युवाओं में ठहराव, समर्पण और काम के प्रति जुनून की कमी देखने को मिल रही है। वे छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक तनाव लेने लगे हैं। हाल ही में एक अध्ययन में यह आंकड़े सामने आए हैं कि 25 साल की उम्र के 90 प्रतिशत युवा कर्मचारी मानसिक तनाव से ग्रस्त पाए गए हैं। यह मानसिक असंतुलन कभी-कभी उन्हें खुद को नुकसान पहुँचाने के ख्यालों तक ले जाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 45 साल से ऊपर के कर्मचारियों में चिंता और अवसाद के मामले बढ़े हैं, और उनमें से कई लोग काउंसलिंग के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह चिंता की बात है कि पिछले कुछ वर्षों में आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है, और ऑफिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं 15 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। सर्वे में यह भी सामने आया है कि 59 प्रतिशत कर्मचारियों में खुद को नुकसान पहुँचाने की प्रवृत्ति देखी गई है, और 30 प्रतिशत लोगों में गहरे डिप्रेशन के लक्षण पाए गए हैं। साथ ही 30 प्रतिशत से अधिक लोग इस तनाव और डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए जागरूक हो रहे हैं, जबकि 30 प्रतिशत को आत्महत्या का खतरा अधिक है।

तनाव और डिप्रेशन के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • मानसिक असमंजस और अवसाद को व्यक्त करने में कठिनाई
  • चिड़चिड़ापन और गुस्से का बढ़ना
  • व्यवहार में बदलाव
  • काम में रुचि की कमी
  • लोगों से दूरी बनाना
  • रोने की स्थिति बार-बार बनना
  • खाने में परेशानी होना

तनाव और डिप्रेशन से बचने के लिए कुछ उपायों को अपनाना चाहिए:

  1. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं, और पर्याप्त नींद लें (रात में 6-8 घंटे)
  2. संतुलित और पौष्टिक आहार लें और अपनी पसंदीदा चीजों को आहार में शामिल करें।
  3. योग और मेडिटेशन का अभ्यास करें।
  4. नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में शामिल हों।
  5. काम से कुछ समय का ब्रेक लें और परिवार व दोस्तों के साथ समय बिताएं।
  6. अपने मानसिक तनाव को किसी से साझा करें और काउंसलिंग का सहारा लें।
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