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हर साल लाखों लोग हो रहे हैं पार्किंसंस रोग के शिकार, जानिए कैसे पहचाने लक्षण और बचें इससे

हर साल लाखों लोग हो रहे हैं पार्किंसंस रोग के शिकार, जानिए कैसे पहचाने लक्षण और बचें इससे

बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई तरह की समस्याएं उभरने लगती हैं, जिनमें से एक गंभीर स्थिति पार्किंसंस रोग भी है। यह एक न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र से जुड़ी) बीमारी है जो सामान्य मूवमेंट यानी शरीर की गति को प्रभावित करती है। पहले यह रोग अधिकतर 60 वर्ष की उम्र के बाद सामने आता था, लेकिन अब 40 की उम्र पार करते ही कुछ लोगों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे हैं। अच्छी देखभाल, समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्या है पार्किंसंस रोग?

पार्किंसंस एक न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क की कुछ खास तंत्रिका कोशिकाएं धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं या नष्ट हो जाती हैं। इससे ब्रेन में डोपामाइन नामक रासायनिक तत्व की मात्रा घटने लगती है, जो शरीर की मूवमेंट को नियंत्रित करता है। डोपामाइन की कमी से शरीर में असामान्य गतिविधियां शुरू हो जाती हैं, जो इस रोग के लक्षणों का कारण बनती हैं।

पार्किंसंस के आम लक्षण:

डॉ. उपासना गर्ग (रीजनल टेक्निकल चीफ, अपोलो डायग्नोस्टिक, मुंबई) बताती हैं कि अक्सर लोग इस बीमारी के लक्षणों को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा समझकर अनदेखा कर देते हैं। जबकि समय रहते पहचान लेने पर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं:

  • हाथों में लगातार कंपन या थरथराहट (विशेषकर आराम की स्थिति में)
  • मूवमेंट में धीरेपन का अनुभव
  • हाथ-पैरों या शरीर में अकड़न
  • बैलेंस बिगड़ना, चलते समय झुकाव होना
  • चलने-फिरने में कठिनाई
  • बोलने में रुकावट या आवाज धीमी होना
  • गिरने की आशंका बढ़ना

ध्यान रहे कि ये सभी लक्षण हर मरीज़ में एक जैसे नहीं होते, लेकिन इनमें से कोई भी दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करें।

पार्किंसंस होने के संभावित कारण:

हालांकि इसका कोई निश्चित कारण अब तक सामने नहीं आया है, लेकिन कुछ रिसर्च बताती हैं कि आनुवंशिक (genetic) और पर्यावरणीय (environmental) कारण मिलकर इस रोग की संभावना बढ़ा सकते हैं। खासकर निम्न कारणों से खतरा ज्यादा हो सकता है:

  • पारिवारिक इतिहास (फैमिली हिस्ट्री)
  • सिर पर चोट लगना
  • ज़हरीले केमिकल्स के संपर्क में आना
  • उम्र बढ़ना

पार्किंसंस से कैसे बचा जाए?

डॉ. गर्ग के अनुसार, यदि समय पर इस बीमारी की पहचान हो जाए, तो दवाओं और इलाज से इसके असर को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ उपाय अपनाकर इसके खतरे को घटाया जा सकता है:

  • नियमित न्यूरोलॉजिकल जांच कराएं
  • फैमिली हिस्ट्री की जानकारी रखें
  • आवश्यकतानुसार DaTscanMRI जैसी जांचें कराएं
  • फिजिकल थैरेपी, एक्सरसाइज़ और हेल्दी डाइट को जीवनशैली में शामिल करें
  • मानसिक तनाव को कम करें और नींद पूरी लें

पार्किंसंस रोग भले ही उम्र के साथ बढ़ने वाली स्थिति हो, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है। जागरूक रहना, लक्षणों को पहचानना और सही समय पर इलाज शुरू करना ही इसका सबसे बेहतर समाधान है।

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