मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

‘पंचायत सीजन 4’ रिव्यू: राजनीति की गर्माहट में तपता फुलेरा, क्या इस बार भी बना दर्शकों का चहेता?

‘पंचायत सीजन 4’ रिव्यू: राजनीति की गर्माहट में तपता फुलेरा, क्या इस बार भी बना दर्शकों का चहेता?

अमेजन प्राइम वीडियो पर ‘पंचायत’ का चौथा सीजन आखिरकार रिलीज हो गया है। इस बार कहानी का केंद्र फुलेरा गांव में हो रहे चुनाव हैं, जहां सत्ता की कुर्सी के लिए गहमागहमी है। दो नए किरदारों की एंट्री के साथ शो में ताजगी लाने की कोशिश हुई है, लेकिन सवाल यही है कि क्या यह सीजन भी पहले की तरह दिल जीतने में कामयाब रहा?
इस सीजन की शुरुआत वहीं से होती है जहां पिछला खत्म हुआ था – प्रधान जी पर हमले के बाद गांव का राजनीतिक पारा चढ़ चुका है। मंजू देवी और क्रांति देवी के बीच प्रधानी के लिए जबरदस्त टक्कर है। सचिव जी इस बार भी CAT के रिजल्ट की बाट जोह रहे हैं, साथ ही बनराकस के केस और रिंकी से अपने संबंधों को लेकर भी उलझे हैं।
जितेंद्र कुमार (सचिव जी) एक बार फिर उन्होंने अपने किरदार को पूरी सादगी और सहजता से निभाया है। इस बार थोड़ा गंभीर और संजीदा भी नजर आते हैं।
नीना गुप्ता (मंजू देवी) राजनीतिक मैदान में उनका आत्मविश्वास और अभिनय दोनों शानदार हैं।
रघुबीर यादव (प्रधान जी) घायल अवस्था में भी उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावी रहा।
दुर्गेश कुमार, फैजल मलिक और सुनीता राजवार जैसे सह कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया।
चंदन कुमार की स्क्रिप्ट इस बार पहले जितनी धारदार नहीं लगी। संवादों में वो चुभन और भाव नहीं दिखी जो पिछले सीजन की पहचान थी। निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा ने माहौल तो जीवंत रखा, लेकिन कहानी की पकड़ कुछ जगहों पर ढीली पड़ी।
गांव की राजनीति और चुनावी तिकड़मों को बारीकी से दिखाया गया। सभी कलाकार अपनी भूमिकाओं में पूरी तरह घुले-मिले दिखे। सत्ता और भ्रष्टाचार की हकीकत को बिना बनावटीपन के दिखाया गया। सचिव जी और रिंकी की प्रेम कहानी को आगे बढ़ता देखना सुखद रहा।
कुछ एपिसोड बेजान और खिंचे-खिंचे लगे।
कॉमेडी की मात्रा इस बार काफी कम थी।
कहानी को 8 एपिसोड तक ले जाने के लिए जबरन फैलाया गया।
रिंकी का किरदार पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया।
अगर आप ‘पंचायत’ के लंबे समय से प्रशंसक हैं, तो यह सीजन जरूर देखें, लेकिन बहुत ज्यादा उम्मीदें न पालें। यह सीजन मनोरंजन देता है, लेकिन वह गहराई और आत्मीयता नहीं दे पाता जो पहले सीजन का आकर्षण थी। ‘पंचायत 4’ एक ठीक-ठाक सीजन है जो पुराने फुलेरा की याद तो दिलाता है, लेकिन उस जादू को पूरी तरह दोहराने में नाकाम रहता है।

Share This
अगला लेख → पूर्व स्पिनर दिलीप दोशी के निधन से खेल जगत शोक में डूबा, सचि…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
26°C
Patchy rain nearby
💧 89% 💨 4 km/h
Dehradun