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‘पंचायत सीजन 4’ रिव्यू: राजनीति की गर्माहट में तपता फुलेरा, क्या इस बार भी बना दर्शकों का चहेता?

‘पंचायत सीजन 4’ रिव्यू: राजनीति की गर्माहट में तपता फुलेरा, क्या इस बार भी बना दर्शकों का चहेता?

अमेजन प्राइम वीडियो पर ‘पंचायत’ का चौथा सीजन आखिरकार रिलीज हो गया है। इस बार कहानी का केंद्र फुलेरा गांव में हो रहे चुनाव हैं, जहां सत्ता की कुर्सी के लिए गहमागहमी है। दो नए किरदारों की एंट्री के साथ शो में ताजगी लाने की कोशिश हुई है, लेकिन सवाल यही है कि क्या यह सीजन भी पहले की तरह दिल जीतने में कामयाब रहा?
इस सीजन की शुरुआत वहीं से होती है जहां पिछला खत्म हुआ था – प्रधान जी पर हमले के बाद गांव का राजनीतिक पारा चढ़ चुका है। मंजू देवी और क्रांति देवी के बीच प्रधानी के लिए जबरदस्त टक्कर है। सचिव जी इस बार भी CAT के रिजल्ट की बाट जोह रहे हैं, साथ ही बनराकस के केस और रिंकी से अपने संबंधों को लेकर भी उलझे हैं।
जितेंद्र कुमार (सचिव जी) एक बार फिर उन्होंने अपने किरदार को पूरी सादगी और सहजता से निभाया है। इस बार थोड़ा गंभीर और संजीदा भी नजर आते हैं।
नीना गुप्ता (मंजू देवी) राजनीतिक मैदान में उनका आत्मविश्वास और अभिनय दोनों शानदार हैं।
रघुबीर यादव (प्रधान जी) घायल अवस्था में भी उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावी रहा।
दुर्गेश कुमार, फैजल मलिक और सुनीता राजवार जैसे सह कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया।
चंदन कुमार की स्क्रिप्ट इस बार पहले जितनी धारदार नहीं लगी। संवादों में वो चुभन और भाव नहीं दिखी जो पिछले सीजन की पहचान थी। निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा ने माहौल तो जीवंत रखा, लेकिन कहानी की पकड़ कुछ जगहों पर ढीली पड़ी।
गांव की राजनीति और चुनावी तिकड़मों को बारीकी से दिखाया गया। सभी कलाकार अपनी भूमिकाओं में पूरी तरह घुले-मिले दिखे। सत्ता और भ्रष्टाचार की हकीकत को बिना बनावटीपन के दिखाया गया। सचिव जी और रिंकी की प्रेम कहानी को आगे बढ़ता देखना सुखद रहा।
कुछ एपिसोड बेजान और खिंचे-खिंचे लगे।
कॉमेडी की मात्रा इस बार काफी कम थी।
कहानी को 8 एपिसोड तक ले जाने के लिए जबरन फैलाया गया।
रिंकी का किरदार पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया।
अगर आप ‘पंचायत’ के लंबे समय से प्रशंसक हैं, तो यह सीजन जरूर देखें, लेकिन बहुत ज्यादा उम्मीदें न पालें। यह सीजन मनोरंजन देता है, लेकिन वह गहराई और आत्मीयता नहीं दे पाता जो पहले सीजन का आकर्षण थी। ‘पंचायत 4’ एक ठीक-ठाक सीजन है जो पुराने फुलेरा की याद तो दिलाता है, लेकिन उस जादू को पूरी तरह दोहराने में नाकाम रहता है।

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