क्या दूसरे राज्यों में भी दिख रहा योगी मॉडल? बिहार के जमुई कांड से कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार का मॉडल पिछले कुछ वर्षों से देशभर की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई, गैंगस्टरों पर कार्रवाई और पुलिस के सख्त रवैये को सरकार अपने कानून-व्यवस्था मॉडल की पहचान बताती रही है। अब बिहार के जमुई में सामने आए एक मामले के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है—क्या दूसरे राज्यों में भी अपराधियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त पुलिस कार्रवाई का रुझान दिखाई दे रहा है?
बिहार के जमुई में 19 सितंबर को 10वीं कक्षा की एक छात्रा और उसके सहपाठी के साथ कथित बदसलूकी और छेड़खानी का मामला सामने आया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। पुलिस ने संबंधित धाराओं और POCSO Act के तहत FIR दर्ज की और मामले की जांच के लिए SIT बनाई। पुलिस के मुताबिक इस मामले में करीब सात लोगों की पहचान हुई थी।
इसके बाद 22 सितंबर को मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पकड़ने के दौरान मुठभेड़ हुई और उसके पैर में गोली लगी। उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के दौरान एक अन्य आरोपी भी पकड़ा गया।
यहीं से उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल की चर्चा फिर शुरू होती है।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के समर्थक लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। यूपी में गैंगस्टर एक्ट, संपत्ति पर कार्रवाई और पुलिस मुठभेड़ों को लेकर सरकार की नीति पर देशभर में बहस भी हुई है।
बिहार पुलिस ने इस मामले में FIR, SIT और गिरफ्तारी की कार्रवाई की है और मुठभेड़ में आरोपी के घायल होने की बात पुलिस ने कही है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में बिहार सरकार की ओर से इस कार्रवाई को आधिकारिक तौर पर “योगी मॉडल” घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं है।
क्या कानून-व्यवस्था के मामले में अब राज्यों के बीच एक नया मॉडल बन रहा है—जहां अपराध के बाद सिर्फ FIR और गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अपराधियों के खिलाफ तेज और कठोर पुलिस कार्रवाई को भी प्राथमिकता दी जा रही है?
उत्तर प्रदेश के आंकड़े भी इस बहस को महत्वपूर्ण बनाते हैं। NCRB के 2023 आंकड़ों के मुताबिक यूपी में IPC अपराध की दर 181.3 प्रति लाख आबादी रही, जबकि राष्ट्रीय दर 270.3 प्रति लाख थी। महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर यूपी में 58.6 प्रति लाख, जबकि राष्ट्रीय दर 66.2 प्रति लाख थी।
इसी लिए आम आदमी के लिए कानून-व्यवस्था का मतलब सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। उसके लिए कानून-व्यवस्था का मतलब है कि सड़क पर निकलते समय डर न हो, बेटियां सुरक्षित महसूस करें, दबंग के खिलाफ शिकायत करने में डर न लगे और पुलिस शिकायत मिलने के बाद तेजी से कार्रवाई करे।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार इसी धारणा को अपने कानून-व्यवस्था मॉडल की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है। वहीं दूसरे राज्यों में भी अपराध की गंभीर घटनाओं के बाद पुलिस की तेज कार्रवाई की मांग लगातार बढ़ रही है।
यही वह सवाल है जिस पर आने वाले समय में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे राज्यों की कानून-व्यवस्था की राजनीति भी बहस करेगी।