मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की RSS मांग पर कांग्रेस का हमला, बोली – ये लोकतंत्र पर सीधा हमला है

संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की RSS मांग पर कांग्रेस का हमला, बोली – ये लोकतंत्र पर सीधा हमला है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले द्वारा संविधान की प्रस्तावना से “समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्दों को हटाने की बात कहने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इसे भाजपा और आरएसएस की सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि उनका असली इरादा संविधान को कमजोर करना और लोकतंत्र की आत्मा को खत्म करना है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, “RSS कभी भी भारत के संविधान को स्वीकार नहीं कर पाया। 1949 के बाद से ही संघ के विचारक और नेता डॉ. आंबेडकर, पंडित नेहरू और संविधान सभा के अन्य सदस्यों को लगातार अपमानित करते आए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस हमेशा मनुस्मृति जैसे ग्रंथों को संविधान से ऊपर रखने की कोशिश करता रहा है गुरुवार को एक कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबोले ने कहा था कि “समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्द भारत के संविधान की मूल प्रस्तावना का हिस्सा नहीं थे और इन्हें इमरजेंसी के दौरान 1976 में जोड़ा गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन विचारधाराओं को हमेशा के लिए प्रस्तावना में रहना चाहिए? क्या यह भारत के लिए शाश्वत मूल्य हैं? जयराम रमेश ने कहा, “2024 लोकसभा चुनाव में मोदी जी और बीजेपी ने नए संविधान की बात कही थी, लेकिन जनता ने इस विचार को पूरी तरह नकार दिया। अब जब चुनाव में हार मिली तो संविधान को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिशें फिर से शुरू हो गई हैं।” कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि प्रस्तावना का मूल ढांचा नहीं बदला जा सकता। जयराम रमेश ने 25 नवंबर 2024 के एक फैसले की प्रति भी साझा करते हुए कहा कि “जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दे दिया, तो अब यह मुद्दा फिर क्यों उठाया जा रहा है?” RSS की यह टिप्पणी इमरजेंसी के संदर्भ में दी गई थी, जहां होसबोले ने कहा कि आपातकाल के दौरान जब लोकतंत्र ठप पड़ा था, तब इन दो शब्दों को जोड़कर संविधान के मूल स्वरूप में बदलाव किया गया। हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि इस बहस के पीछे राजनीतिक मंशा छिपी है – भारत के संविधान को फिर से लिखने की। RSS और भाजपा की तरफ से बार-बार संविधान की प्रस्तावना या ढांचे में बदलाव की बात विपक्ष को लगातार सतर्क कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ दो शब्दों को हटाने की बात नहीं है, बल्कि इससे उस लोकतांत्रिक और समावेशी भारत की नींव पर चोट पहुंचती है, जिसकी कल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी।

Share This
अगला लेख → 22 साल तक छिपा रहा पत्नी का हत्यारा, बोरे में भरकर लाश बस मे…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
26°C
Patchy rain nearby
💧 89% 💨 4 km/h
Dehradun