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जस्टिस वर्मा पर महाभियोग प्रस्ताव मंजूर, स्पीकर ओम बिरला ने कमेटी गठित कर घोषित किए सदस्य

जस्टिस वर्मा पर महाभियोग प्रस्ताव मंजूर, स्पीकर ओम बिरला ने कमेटी गठित कर घोषित किए सदस्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड मामले में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव पर 146 सांसदों, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों शामिल हैं, ने हस्ताक्षर किए हैं। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव, और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल हैं। कमेटी की रिपोर्ट आने तक प्रस्ताव लंबित रहेगा।

जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। इसके बाद 28 मार्च 2025 को उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया।

महाभियोग की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत निर्धारित है। किसी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए लोकसभा या राज्यसभा में प्रस्ताव लाया जा सकता है। प्रस्ताव को स्पीकर या सभापति के सामने पेश किया जाता है, जो जांच के लिए कमेटी गठित करते हैं। कमेटी में सुप्रीम कोर्ट का एक जज, हाईकोर्ट का एक चीफ जस्टिस, और एक विधि विशेषज्ञ शामिल होते हैं। कमेटी सबूत और गवाहों के बयान ले सकती है। यदि कमेटी जज को दोषी पाती है, तो उसकी रिपोर्ट संसद में पेश की जाती है। दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होने पर जज को हटाया जा सकता है।

जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और तत्कालीन CJI संजीव खन्ना की राष्ट्रपति को हटाने की सिफारिश को चुनौती दी थी। हालांकि, 7 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिससे महाभियोग की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया।[

जांच कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इस मामले में एकमत दिख रहे हैं, जिससे जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की संभावना प्रबल है।

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