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शी जिनपिंग का गुप्त पत्र: ट्रंप के टैरिफ से पहले ही भारत-चीन रिश्तों में सुधार की नींव!

शी जिनपिंग का गुप्त पत्र: ट्रंप के टैरिफ से पहले ही भारत-चीन रिश्तों में सुधार की नींव!

भारत-चीन संबंधों में हाल के महीनों में सुधार देखा गया है, और इसके पीछे एक अहम भूमिका चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मार्च 2025 में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे गए एक गुप्त पत्र की मानी जा रही है। इस पत्र में शी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की इच्छा जताई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से उत्पन्न व्यापारिक तनाव के खिलाफ सहयोग का प्रस्ताव रखा।

शी जिनपिंग ने पत्र में अमेरिकी टैरिफ के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए भारत से सहयोग की अपील की थी। उन्होंने अमेरिकी समझौतों पर चिंता जताई, जो चीन के हितों को नुकसान पहुंचा सकते थे, और एक नए कूटनीतिक संपर्क सूत्र का सुझाव दिया।

हालांकि भारत ने शुरुआत में इस पत्र पर कोई तत्काल जवाब नहीं दिया और जून 2025 तक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। हालांकि, बाद में भारत ने व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल की चीन यात्राएं और चीनी विदेश मंत्री वांग यी का भारत दौरा शामिल है।

ट्रंप की टैरिफ नीति, जिसमें भारत पर 50% तक टैरिफ और रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध शामिल थे, ने भारत को चीन के साथ संबंध सुधारने के लिए प्रेरित किया। इन टैरिफ ने वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल मचाई, जिसका औसत अमेरिकी टैरिफ दर जनवरी से अप्रैल 2025 तक 2.5% से बढ़कर 27% हो गया।

दोनों देशों ने 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए कदम उठाए। सीमा विवादों को हल करने के लिए बातचीत तेज हुई, और व्यापारिक संबंधों में सुधार देखा गया। 2023-24 में भारत-चीन व्यापार 101.7 बिलियन डॉलर तक पहुंचा। भारत और चीन ने पांच साल बाद सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने का फैसला किया। चीन ने भारत को यूरिया आपूर्ति पर प्रतिबंधों में ढील दी, और भारत ने चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से खोले।

31 अगस्त 2025 को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है, जो सात साल बाद मोदी की पहली चीन यात्रा होगी। यह मुलाकात संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ट्रंप की नीतियों ने भारत को चीन और रूस के करीब जाने के लिए प्रेरित किया, जिससे अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति कमजोर पड़ सकती है। भारत को चीन के खिलाफ एक काउंटरवेट के रूप में देखने की अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।

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