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नेपाल जैसे हालात का भारत में खतरा? अखिलेश यादव बोले– पड़ोसी देशों और सीमाओं पर शांति रखना पहली प्राथमिकता, सरकार की विदेश नीति पर सवाल l

नेपाल जैसे हालात का भारत में खतरा? अखिलेश यादव बोले– पड़ोसी देशों और सीमाओं पर शांति रखना पहली प्राथमिकता, सरकार की विदेश नीति पर सवाल l

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नेपाल में unfolding संकट और हिंसक प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी है। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में शांति बनाए रखना भारत सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

पत्रकारों ने अखिलेश यादव से सवाल किया कि श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल में आंदोलन और हिंसा देखी जा रही है। क्या ऐसी स्थिति भारत में भी पैदा हो सकती है? इस पर अखिलेश ने कहा,
“भारत की विदेश नीति कई बार कमजोर साबित हुई है। हम यह देख चुके हैं कि श्रीलंका से लेकर बांग्लादेश और अब नेपाल तक हालात बिगड़ते गए। पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सीमाओं पर तनाव और अव्यवस्था न फैलने पाए और शांति बनी रहे।”

अखिलेश यादव ने केंद्र की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि जिन देशों से भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते हैं, वहां तनाव की स्थिति भारत की असफल कूटनीतिक रणनीति का संकेत देती है। उन्होंने कहा कि नेपाल में हालात खतरनाक हो रहे हैं और भारत को एक जिम्मेदार पड़ोसी देश की तरह वहां लोकतांत्रिक संवाद और स्थिरता के लिए मदद करनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने इस सवाल का सीधा जवाब देते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र गहरा है, लेकिन अगर बेरोजगारी, आर्थिक संकट और सामाजिक असंतोष बढ़े तो कहीं भी अशांति फैल सकती है। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि युवाओं को रोजगार दे और जनता की समस्याओं का समाधान करे।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अत्यधिक रोक लोगों में गुस्सा पैदा कर सकती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

अखिलेश यादव के इस बयान को न सिर्फ पड़ोसी देशों की स्थिति पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह भारत में मौजूदा हालात पर उनका अप्रत्यक्ष हमला भी माना जा रहा है। विशेषकर युवाओं के बीच बेरोजगारी और आर्थिक दबाव को लेकर उन्होंने सरकार को चेतावनी देने की कोशिश की है।

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में विपक्ष नेपाल जैसे पड़ोसी देशों की स्थितियों को उदाहरण बनाकर केंद्र सरकार पर हमला तेज कर सकता है। यह मुद्दा विदेश नीति से जुड़े सवालों के साथ-साथ घरेलू असंतोष और युवाओं की नाराजगी को भी हवा दे सकता है।

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