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प्रदूषण पर असहज हुई सरकारें: CJI ने कहा—‘उपाय कागज़ों पर नहीं, जमीन पर दिखें

प्रदूषण पर असहज हुई सरकारें: CJI ने कहा—‘उपाय कागज़ों पर नहीं, जमीन पर दिखें

देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि अदालत इस स्थिति को देखते हुए “ना चुप बैठ सकती है और ना ही यह मान सकती है कि इसका कोई समाधान नहीं है।” उन्होंने साफ कर दिया कि वायु प्रदूषण के मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि उन्हें जानकारी दी गई कि इस मामले को इसलिए सूचीबद्ध किया गया क्योंकि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार देखा गया है। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण को किसी सीजनल समस्या की तरह नहीं देखा जा सकता, जो केवल अक्टूबर-नवंबर में ही सामने आती है। उन्होंने कहा कि अदालत अब शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों प्लान पर नज़र रखेगी।

CJI ने CAQM (Commission for Air Quality Management) के शॉर्ट-टर्म प्लान के बारे में जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी शहर को इतनी बड़ी आबादी या हर घर में कई कारों के हिसाब से कभी विकसित नहीं किया गया। इसलिए यह देखना जरूरी है कि प्रदूषण रोकने के लिए सुझाए गए उपाय कितने व्यवहारिक हैं और क्या ये केवल कागज़ों पर ही मौजूद हैं।

इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्य भाटी ने कहा कि कमीशन हर राज्य सरकार के साथ बैठकर एक्शन प्लान तैयार कर रहा है। लेकिन CJI ने तुरंत कहा कि योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है—उन्हें लागू करना भी अनिवार्य है। ASG ने आगे बताया कि प्रदूषण के मुख्य कारण पराली जलाना, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, सड़क की धूल और बायोमास जलाना हैं। उन्होंने कहा कि वह हर श्रेणी के तहत उठाए गए कदमों की विस्तृत सूची कोर्ट में दे सकती हैं।

इस बीच CJI की नाराज़गी तब बढ़ गई जब चर्चा बार-बार पराली जलाने पर आ रही थी। उन्होंने कहा कि किसानों पर दोष डालना आसान है क्योंकि उनका अदालत में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “COVID के दौरान पराली जलाना भी होता था, लेकिन तब हम नीला आसमान और तारे देख सकते थे। क्यों? ज़ाहिर है, कुछ और कारण भी हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।”

अंत में CJI ने निर्देश दिया कि अगले एक सप्ताह के भीतर अदालत को उन सभी “दूसरे फैक्टर्स” पर विस्तृत रिपोर्ट दी जाए, जिन पर काबू पाने के लिए कदम उठाने का दावा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले की नियमित निगरानी तब तक करेगी जब तक दिल्ली-NCR की हवा की स्थिति में ठोस सुधार दिखाई नहीं देता।

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