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उन्नाव केस के बीच कुलदीप सेंगर की बेटी का भावुक पत्र, सोशल मीडिया पर छलका दर्द

उन्नाव केस के बीच कुलदीप सेंगर की बेटी का भावुक पत्र, सोशल मीडिया पर छलका दर्द

उन्नाव रेप केस में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी डॉ. इशिता सेंगर ने वर्षों की चुप्पी तोड़ते हुए एक भावुक और पीड़ादायक पोस्ट के जरिए अपना दर्द सार्वजनिक किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए इस पत्र में उन्होंने खुद को थकी हुई, डरी हुई लेकिन अब भी न्याय की उम्मीद से जुड़ी हुई बेटी बताया है। उन्होंने लिखा कि आठ वर्षों तक उनकी चुप्पी कमजोरी नहीं थी, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था, संविधान और कानून पर भरोसे का नतीजा थी, जो अब टूटता हुआ महसूस हो रहा है।

इशिता सेंगर ने लिखा कि उन्होंने और उनके परिवार ने यह सोचकर चुप रहना चुना कि सच अपने आप सामने आएगा। उन्होंने न तो सड़कों पर प्रदर्शन किया, न टीवी डिबेट्स में शोर मचाया और न ही सोशल मीडिया पर हैशटैग चलाए। उनका विश्वास था कि न्याय तमाशे का मोहताज नहीं होता। लेकिन इस चुप्पी की कीमत उन्हें लगातार अपमान, गालियों और अमानवीय व्यवहार के रूप में चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उन्हें सिर्फ “भाजपा विधायक की बेटी” के लेबल में कैद कर दिया गया, जैसे उनकी इंसानियत, सम्मान और बोलने का अधिकार ही खत्म हो गया हो।

अपने पोस्ट में इशिता ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें सोशल मीडिया पर बार-बार कहा गया कि उन्हें जीने का हक नहीं है, उनका रेप किया जाना चाहिए या उन्हें मार दिया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि यह नफरत काल्पनिक नहीं बल्कि रोजमर्रा की हकीकत बन चुकी है। जब कोई इंसान यह महसूस करता है कि समाज का एक बड़ा हिस्सा उसे जीने के लायक नहीं मानता, तो यह अंदर से तोड़ देता है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने हर दरवाजा खटखटाया—अधिकारियों से लेकर मीडिया संस्थानों तक—लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी।

इशिता सेंगर ने सवाल उठाया कि अगर उन्हें ताकतवर कहा जाता है, तो वह ताकत कैसी है जो किसी परिवार को आठ साल तक खामोश और बेबस बनाए रखती है। उन्होंने कहा कि उनका सच इसलिए अनसुना किया गया क्योंकि वह किसी के काम का नहीं था, न कि इसलिए कि तथ्यों या सबूतों की कमी थी। आज वह सिर्फ अन्याय से नहीं, बल्कि उस डर से भी भयभीत हैं, जो समाज, संस्थानों, पत्रकारों और यहां तक कि न्याय प्रणाली पर भी चुप्पी का दबाव बनाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पत्र न तो धमकी है और न ही सहानुभूति पाने की कोशिश। यह एक डरी हुई बेटी की अपील है, जो अब भी इस देश पर भरोसा करती है। उन्होंने आग्रह किया कि कानून को बिना किसी डर और दबाव के अपना काम करने दिया जाए, सबूतों की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई को सिर्फ इसलिए न दबाया जाए क्योंकि वह लोकप्रिय नहीं है। उन्होंने अंत में लिखा कि वह अब भी न्याय का इंतजार कर रही एक बेटी हैं और नहीं चाहतीं कि देश की न्याय व्यवस्था पर उनका विश्वास टूटे।

गौरतलब है कि उन्नाव रेप केस वर्ष 2017 का है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर पर नाबालिग के अपहरण और बलात्कार का आरोप लगा था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी। दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने 20 दिसंबर 2019 को सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और उसे मृत्यु तक जेल में रखने का आदेश दिया था। साथ ही उस पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई और भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई राहत पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि आरोप गंभीर हैं और ऐसे अपराध में जमानत का कोई आधार नहीं बनता।

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