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India-US Trade Deal: व्हाइट हाउस के दावे बनाम हकीकत, रूस ने साफ की स्थिति

India-US Trade Deal: व्हाइट हाउस के दावे बनाम हकीकत, रूस ने साफ की स्थिति

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित ट्रेड डील को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय और व्हाइट हाउस की ओर से किए गए दावों ने नई बहस को जन्म दे दिया है। खास तौर पर रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिकी पक्ष के बयानों पर अब रूस की सीधी प्रतिक्रिया आ गई है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने दावा किया कि भारत ने इस ट्रेड डील के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने और इसके बजाय अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत वेनिजुएला से भी तेल खरीदेगा, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होगा।

कैरोलाइन लेविट के मुताबिक यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद लिया गया। उन्होंने दोनों नेताओं के संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि इसी भरोसे और आपसी समझ के कारण यह “बेहतरीन ट्रेड डील” संभव हो पाई।

अमेरिकी प्रेस सेक्रेटरी ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में करीब 500 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। यह निवेश ऊर्जा, परिवहन और कृषि क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी थी कि इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर लगने वाला अमेरिकी टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका से अधिक मात्रा में तेल खरीदेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए टैरिफ में कटौती को दोनों देशों के व्यापार के लिए सकारात्मक कदम बताया था।

हालांकि इन दावों के बीच रूस ने तस्वीर साफ कर दी है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना या बयान नहीं मिला है। उन्होंने पश्चिमी मीडिया में चल रही उन खबरों पर भी सवाल उठाए, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के कारण भारत रूस से दूरी बना सकता है।

रूस के इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत-रूस के बीच कूटनीतिक संवाद जारी है, और तेल व्यापार को लेकर किसी भी बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। ऐसे में अमेरिका की ओर से किए गए दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर ने इस ट्रेड डील को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।

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