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UP SIR पर सियासी संग्राम, BJP के गढ़ों में सबसे ज्यादा कटे वोट

UP SIR पर सियासी संग्राम, BJP के गढ़ों में सबसे ज्यादा कटे वोट

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रक्रिया के तहत जारी आंकड़ों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव वाले जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने की बात सामने आई है, जबकि मुस्लिम बहुल जिलों में यह कमी अपेक्षाकृत कम रही है।

आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, गौतमबुद्धनगर और मेरठ जैसे शहरी जिलों में मतदाताओं की संख्या में 18.75 प्रतिशत से लेकर 22.89 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। ये सभी जिले ऐसे माने जाते हैं जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का मजबूत प्रदर्शन रहा था और लोकसभा चुनावों में भी इन क्षेत्रों को पार्टी का गढ़ माना जाता है। खास तौर पर साहिबाबाद, नोएडा, लखनऊ उत्तर, आगरा कैंट और इलाहाबाद नॉर्थ जैसी सीटों पर सबसे अधिक नाम कटे हैं, जहां वर्तमान में बीजेपी के विधायक हैं।

इसके उलट, संभल, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाता संख्या में कमी अपेक्षाकृत कम देखने को मिली है। इन जिलों में 9 से 14 प्रतिशत के बीच गिरावट दर्ज की गई है। यह अंतर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं सामने आ रही हैं।

विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य की 16 विधानसभा सीटों पर एक लाख से अधिक मतदाता कम हुए, जिनमें से 15 सीटें बीजेपी के प्रभाव क्षेत्र में आती हैं। इसी तरह 21 सीटों पर 80 से 99 हजार तक नाम कटे, जिनमें 19 सीटें बीजेपी से जुड़ी हैं। 82 सीटों पर 50 से 80 हजार के बीच मतदाता कम हुए, जिनमें 55 सीटें बीजेपी या उसके सहयोगी दलों की हैं। कुल मिलाकर 159 विधानसभा सीटों पर 30 से 50 हजार तक नाम कम हुए, जिनमें से 95 सीटें बीजेपी के खाते में हैं।

हालांकि इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं हटाया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया से असंतुष्ट है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील कर सकता है। पहले चरण में जिलाधिकारी के समक्ष और उसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील का प्रावधान है।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, इस विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या में 84 लाख से अधिक की वृद्धि हुई है और यह संख्या अब 13.39 करोड़ तक पहुंच गई है। यह प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 के बीच प्रदेश के सभी 75 जिलों और 403 विधानसभा क्षेत्रों में संचालित की गई थी।

इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विमर्श छेड़ दिया है। आने वाले चुनावों के मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता सूची में हुए इस बदलाव का राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।

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