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राज्यसभा में BJP हुई और मजबूत: AAP के 7 सांसदों के विलय को मंजूरी

राज्यसभा में BJP हुई और मजबूत: AAP के 7 सांसदों के विलय को मंजूरी

राज्यसभा में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ताकत और बढ़ गई है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग हुए सात सांसदों के बीजेपी में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में बीजेपी के सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जो उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

पिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब उसके सात राज्यसभा सांसद—राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रम साहनी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालीवाल—ने एक साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान किया और बीजेपी में शामिल हो गए। इन नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा था कि AAP अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक चुकी है।

इन सांसदों के जाने के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई है। पहले जहां पार्टी के पास सात सदस्य थे, अब उसकी संख्या घटकर मात्र तीन रह गई है। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी छोड़ने वाले ज्यादातर सांसद पंजाब से हैं, जिससे राज्य की राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।

इस घटनाक्रम के बाद AAP ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सातों सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की अपील की थी। उनका कहना था कि यह कदम दलबदल कानून का उल्लंघन है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

हालांकि, सभापति द्वारा विलय को मंजूरी दिए जाने के बाद AAP की यह मांग खारिज हो गई। राज्यसभा सचिवालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब ये सांसद आधिकारिक रूप से बीजेपी का हिस्सा हैं।

इस राजनीतिक घटनाक्रम ने संसद के भीतर शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है। जहां एक ओर बीजेपी की स्थिति और मजबूत हुई है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।

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