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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र का कमाल, बनाया 176 KMPL माइलेज देने वाला इंजन

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र का कमाल, बनाया 176 KMPL माइलेज देने वाला इंजन

प्रयागराज: माइलेज आज भारतीयों के लिए नई गाड़ी खरीदते समय सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर बन गया है। ऐसे में अगर कोई बाइक सिर्फ एक लीटर पेट्रोल में 176 किलोमीटर चल जाए तो यह किसी सपने जैसा लगता है। लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय (अब प्रयागराज विश्वविद्यालय) के एक पूर्व छात्र शैलेंद्र सिंह गौर ने इस सपने को हकीकत का रूप देने की कोशिश की है।शैलेंद्र सिंह गौर ने reportedly एक सिक्स-स्ट्रोक इंजन विकसित किया है, जिसके लिए उन्हें दो पेटेंट भी मिल चुके हैं। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, इस इंजन ने 2017 मॉडल की 100 सीसी टीवीएस बाइक पर टेस्टिंग के दौरान शानदार प्रदर्शन किया।

परीक्षण में क्या हुआ?
गौर ने अपनी 100 सीसी टीवीएस बाइक को संशोधित करके टेस्ट किया। रिपोर्ट के मुताबिक, बाइक ने मात्र 50 मिलीलीटर पेट्रोल में 35 मिनट तक चलकर 176 किमी प्रति लीटर का माइलेज दिया। एक टीवी कार्यक्रम में सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान यह बाइक एक लीटर पेट्रोल में 120 किलोमीटर तक चलने का दावा भी किया गया।

शैलेंद्र सिंह गौर कौन हैं?
शैलेंद्र सिंह गौर ने वर्ष 1983 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी, रसायन और गणित विषयों के साथ बीएससी की डिग्री प्राप्त की। साल 2007 में उन्हें टाटा मोटर्स की ओर से नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया और स्वतंत्र शोध कार्य को चुना।उन्होंने एमएनएनआईटी (मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के मैकेनिकल विभाग की लैब में प्रोफेसर अनुज जैन के मार्गदर्शन में छह महीने काम किया और बाद में आईआईटी-बीएचयू में भी शोध किया।

बलिदान की कहानी
अपने शोध को जारी रखने के लिए शैलेंद्र सिंह गौर ने अपनी जमीन, दुकान और घर तक बेच दिया। उन्होंने अपने किराए के घर को ही वर्कशॉप में बदल लिया और वर्षों तक कड़ी मेहनत की। करीब 18 साल की मेहनत के बाद उन्होंने यह सिक्स-स्ट्रोक इंजन तैयार किया।

इंजन की खासियतें
गौर का दावा है कि उनका सिक्स-स्ट्रोक इंजन पारंपरिक चार-स्ट्रोक इंजन से तीन गुना ज्यादा कुशल है। यह ईंधन की ऊर्जा का लगभग 70 प्रतिशत उपयोग कर लेता है, जिससे गर्मी का नुकसान कम होता है।

मुख्य फायदे: बहुत अधिक माइलेज (176 किमी/लीटर तक) प्रदूषण में काफी कमी
किसी भी पेट्रोल/डीजल/सीएनजी/इथेनॉल वाली गाड़ी में फिट किया जा सकता है
कार, ट्रक, बस जैसी अन्य वाहनों में भी लगाया जा सकता है

गौर कहते हैं कि यह तकनीक न सिर्फ ईंधन बचाएगी बल्कि वातावरण को भी साफ रखने में मदद करेगी।आगे की राहदो पेटेंट मिलने के बावजूद गौर को अब निवेशकों और ऑटोमोबाइल कंपनियों का समर्थन चाहिए ताकि यह प्रोटोटाइप बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंच सके।यह आविष्कार अगर सफलतापूर्वक बाजार तक पहुंचा तो भारतीय सड़कों पर माइलेज और प्रदूषण दोनों को लेकर एक नई क्रांति ला सकता है।

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