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बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफ़न लेकर आए हैं।…..सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर सियासत तेज, विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा

जंतर-मंतर पर 21 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार की आलोचना की, जबकि अन्य नेताओं ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। पुलिस का कहना है कि कदम स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनज़र उठाया गया।

बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफ़न लेकर आए हैं।…..सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर सियासत तेज, विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 21 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा, जबकि प्रशासन की ओर से इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनज़र उठाया गया कदम बताया जा रहा है।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण आवाज़ों को दबाने से संविधान और लोकतंत्र दोनों आहत होते हैं।

शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर मौजूद समर्थकों ने कार्रवाई का विरोध किया, जिससे कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई।

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने वांगचुक को जबरन हटाया और उनके साथ मारपीट भी की। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनके समर्थकों के अनुसार, वह NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और उनका लगभग 9.5 किलोग्राम वजन कम होने की बात भी सामने आई है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक का प्रतिदिन स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसी क्रम में शनिवार सुबह उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

घटना के बाद इस पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सरकार की आलोचना कर रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है।

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