मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
योगी सरकार ने बिजली विभाग को दिए सख्त निर्देश, त्योहारों में निर्बाध आपूर्ति का बनाया प्लान राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: तीन और आरोपियों की जमानत खारिज, टिन्नू यादव की याचिका पर आज सुनवाई राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की नई रणनीति, यूपी में बदलेंगे ज्यादातर चेहरे, जातीय समीकरण रहेगा कायम ‘पैसे मांगे तो जेल में सड़ना पड़ेगा’, शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देते समय CM योगी की सख्त चेतावनी क्या दूसरे राज्यों में भी दिख रहा योगी मॉडल? बिहार के जमुई कांड से कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल योगी सरकार का जॉब कैलेंडर ऑन! 4 दिन में 5,297 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी CM योगी देंगे 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र, स्वास्थ्य से आयुष तक इन पदों पर मिलेगी नौकरी अमित शाह करेंगे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन, 25 सितंबर से शुरू होगा बड़ा आयोजन ‘बंदूक की राजनीति अब नहीं चलेगी’, मेरठ में सीएम योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला मेरठ में नितिन नवीन का सपा-कांग्रेस पर हमला, बोले- यूपी को फिर बांटने की कोशिश हो रही

राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की नई रणनीति, यूपी में बदलेंगे ज्यादातर चेहरे, जातीय समीकरण रहेगा कायम

राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की नई रणनीति, यूपी में बदलेंगे ज्यादातर चेहरे, जातीय समीकरण रहेगा कायम

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा इस बार ज्यादातर नए चेहरों को मौका दे सकती है। हालांकि, पार्टी सामाजिक और जातीय समीकरण को पहले की तरह ही बनाए रखने की कोशिश करेगी। माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन अलग-अलग सामाजिक वर्गों का संतुलन बरकरार रखा जाएगा।

उत्तर प्रदेश में भाजपा के मौजूदा आठ राज्यसभा सांसदों में से कम से कम पांच को इस बार दोबारा मौका नहीं मिलने की संभावना जताई जा रही है। इनमें दिनेश शर्मा का नाम शामिल नहीं है, क्योंकि वह उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। पार्टी के भीतर चल रही चर्चा के मुताबिक, नए चेहरों के जरिए संगठन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

मौजूदा स्थिति में भाजपा के आठ राज्यसभा सांसदों में चार अगड़ी जातियों, दो ओबीसी, एक अल्पसंख्यक और एक अनुसूचित जाति वर्ग से हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार भी लगभग इसी तरह का सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश होगी। हालांकि, ओबीसी वर्ग में अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति के तहत पार्टी इस वर्ग के प्रतिनिधित्व को दो से बढ़ाकर तीन करने पर विचार कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, राजपूत बिरादरी से आने वाले दोनों मौजूदा चेहरों को इस बार बदले जाने की संभावना है। वहीं, ब्राह्मण समाज से भी किसी नए चेहरे को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा है। इस तरह भाजपा पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को मौका देकर संगठन और आगामी विधानसभा चुनाव दोनों के लिए राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है।

हालांकि, तीन मौजूदा सांसदों को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना भी बताई जा रही है। इनमें पूर्व डीजीपी बृज लाल, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के नाम शामिल हैं। बृज लाल अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं, जबकि बीएल वर्मा ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं हरदीप सिंह पुरी को विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ नेता के तौर पर देखा जाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों को दोबारा मौका देने के पीछे सामाजिक समीकरण के साथ-साथ उनकी राजनीतिक भूमिका भी एक कारण हो सकती है।

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में विधानसभा की मौजूदा संख्या के आधार पर भाजपा को आठ और समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिलने की स्थिति बन रही है। एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होगी। ऐसे में आठवीं सीट के लिए भाजपा को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ सकती है।

वहीं, राजा भैया के नेतृत्व वाले जनसत्ता दल के दो विधायकों और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी के दो विधायकों के रुख को लेकर भी राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं। तीन निर्दलीय विधायकों के साथ इन विधायकों के समर्थन या विरोध का असर राज्यसभा चुनाव की गणित पर पड़ सकता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व वाले राजग के पास करीब 292 विधायकों का समर्थन है और आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी।

राज्यसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में नए चेहरों, सामाजिक समीकरण और सहयोगी दलों के रुख को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह राज्यसभा चुनाव भाजपा और विपक्ष, दोनों के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Share
अगला लेख → राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: तीन और आरोपियों की जमानत खारिज, ट…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *