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पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के पिता इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद

24 वर्ष पुराने चर्चित हत्या मामले में सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला, शूटर समेत तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास लखनऊ, 7 जुलाई। राजधानी के बहुचर्चित पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मुख्य शूटर […]

पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के पिता इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद

24 वर्ष पुराने चर्चित हत्या मामले में सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला, शूटर समेत तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास

लखनऊ, 7 जुलाई। राजधानी के बहुचर्चित पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मुख्य शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया, उसके साथी पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को उम्रकैद के साथ अर्थदंड से भी दंडित किया है।

सीबीआई के विशेष न्यायालय ने 30 जून को तीनों आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया था। मंगलवार को सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इंद्रदेव सिंह वर्तमान गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के पिता तथा सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह के ससुर थे। वह लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में विधि जगत की प्रतिष्ठित हस्ती माने जाते थे।

8 अगस्त 2002 को दिनदहाड़े हुई थी हत्या

इंद्रदेव सिंह की 8 अगस्त 2002 को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह स्कूटर से लखनऊ में जिलाधिकारी कार्यालय के पीछे स्थित मार्ग से गुजर रहे थे। स्कूटर सवार बदमाशों ने उनका पीछा कर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। एक गोली उनकी गर्दन में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। उन्हें बचाया नहीं जा सका और घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई।

दिनदहाड़े हुई इस हत्या से राजधानी में सनसनी फैल गई थी। उस समय यह मामला प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया था।

स्थानीय पुलिस से सीबीआई तक पहुंची जांच

घटना के बाद प्रारंभिक जांच स्थानीय पुलिस ने शुरू की थी, लेकिन मामले की गंभीरता और व्यापक चर्चा को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।

सीबीआई की जांच में सामने आया कि वारदात के समय बृजेश यादव उर्फ मुन्ना स्कूटर चला रहा था, जबकि पीछे बैठे विक्रम यादव उर्फ कालिया ने इंद्रदेव सिंह पर गोली चलाई थी। जांच में पन्ना सिंह की भूमिका भी हत्या की साजिश और घटना में सहयोगी के रूप में सामने आई।

तीन आरोपियों की हो चुकी है मृत्यु

मुकदमे की सुनवाई के दौरान हत्या की साजिश रचने के आरोपी मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता और छोटेलाल उर्फ छोटू की मृत्यु हो गई। इसके चलते न्यायालय ने उनके विरुद्ध चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी।

24 वर्ष बाद आया फैसला

करीब 24 वर्ष तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने इस चर्चित हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाई है। न्यायालय के इस फैसले को लंबे समय से लंबित मामले में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

इस फैसले के साथ ही देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल इस हत्याकांड की सुनवाई का एक अहम अध्याय पूरा हो गया।

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