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‘शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले लोग’—खड़गे के बयान से सदन में हंगामा

‘शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले लोग’—खड़गे के बयान से सदन में हंगामा

संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा संस्थानों को लेकर विवादित टिप्पणी की। खड़गे ने कहा कि देश में ऐसे लोग हैं जो मनुस्मृति की विचारधारा को मानते हैं, जिसमें शूद्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं दिया गया है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

खड़गे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यदि विपक्ष के पास ऐसे दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण है तो वह सदन के सामने पेश करे। उन्होंने कहा कि बिना सबूत के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।

सत्ता पक्ष के विरोध और बढ़ते हंगामे के बीच सभापति ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया और सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।

इस मुद्दे को लेकर कुछ समय तक सदन में तीखी बहस जारी रही। विपक्ष ने अपनी बात रखने की कोशिश की, जबकि सत्ता पक्ष ने खड़गे के बयान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। आखिरकार सभापति के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को तेज कर दिया है। शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसने सदन का माहौल गर्मा दिया।

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