पंजाब चुनाव से पहले गैंगस्टरवाद पर घमासान, CM भगवंत मान ने गुरप्रीत सेखों की AAP एंट्री पर दिया बड़ा बयान
पंजाब में फरवरी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गैंगस्टरवाद का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। अपराध की दुनिया से जुड़े रहे कुछ पूर्व गैंगस्टर और उनके रिश्तेदार अब सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं और चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों की राजनीतिक दलों में एंट्री को लेकर विरोधी पार्टियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और गैंगस्टरवाद बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जीरा विधानसभा क्षेत्र से जुड़े गुरप्रीत सिंह सेखों की आम आदमी पार्टी में एंट्री को लेकर है। फिरोजपुर के मुदकी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले सेखों का नाम अतीत में कई आपराधिक मामलों के चलते चर्चा में रहा है। उनका नाम 2016 के नाभा जेल ब्रेक मामले में भी प्रमुख आरोपियों में शामिल रहा था। वर्ष 2023 में उन्हें अदालत से जमानत मिली। इसके बाद सेखों ने सामाजिक गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक जीवन में अपनी छवि बदलने की कोशिश की।
राजनीतिक तौर पर सेखों की नजदीकी पहले अकाली दल से बताई जाती रही है। अब उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच आम आदमी पार्टी का रुख किया है। 6 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में गुरप्रीत सिंह सेखों ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद विपक्षी दलों ने आप पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सेखों की पार्टी में एंट्री का बचाव करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति को सिर्फ उसके अतीत के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। उनका कहना है कि परिस्थितियां कई बार व्यक्ति को गलत रास्ते पर ले जाती हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपना रास्ता बदलकर मुख्यधारा और सार्वजनिक जीवन में लौटना चाहता है तो उसे अवसर दिया जाना चाहिए। सेखों की पत्नी मंदीप कौर और करीबी रिश्तेदार कुलजीत कौर भी 2025 में हुए जिला परिषद चुनाव जीत चुकी हैं।
पंजाब की राजनीति में एक और चर्चित नाम लखबीर सिंह उर्फ लक्खा सिढाना का है। उस पर अतीत में कई मामले दर्ज रहे हैं। बाद में उसने सामाजिक मुद्दों और मालवा क्षेत्र के युवाओं से जुड़े अभियानों के जरिए अपनी पहचान एक एक्टिविस्ट के तौर पर बनाने की कोशिश की। 26 जनवरी 2021 को लाल किला घटनाक्रम के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आया था। अब अकाली दल से जुड़े वारिस पंजाब दे ने उसे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में मौड़ सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
इसी तरह गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया की मौसी भी डेरा बाबा नानक विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छुक बताई जा रही हैं। वह फिलहाल ब्लॉक समिति की अध्यक्ष हैं। वहीं, पूर्व गैंगस्टर रॉकी की बहन भी फाजिल्का क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। वह इससे पहले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुकी हैं, हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब में अपराध की दुनिया से जुड़े रहे लोगों या उनके रिश्तेदारों की राजनीति में बढ़ती सक्रियता आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकती है। खासकर हत्या, रंगदारी, हथियारों की तस्करी और विदेशों से संचालित गैंग नेटवर्क से जुड़ी घटनाएं पहले से ही पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस का हिस्सा रही हैं।
राजनीतिक मामलों के जानकार परमजीत सिंह के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गैंगस्टरवाद कानून-व्यवस्था के साथ एक अहम राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। पुलिस की ओर से संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन गैंग नेटवर्क से जुड़ी घटनाओं और आपराधिक मामलों की वजह से यह मुद्दा चुनावी बहस में बना रह सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने के लिए गैंगस्टरवाद और अपराध के मुद्दे को और जोर-शोर से उठा सकते हैं।