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UP चुनाव से पहले BJP की एक तस्वीर ने सपा के दावों पर फेरा पानी, लखनऊ में दिखा NDA का दम

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्यसभा चुनाव ने प्रदेश की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। राज्यसभा चुनाव के नामांकन के दौरान लखनऊ में सामने आई BJP और NDA नेताओं की तस्वीरों ने समाजवादी पार्टी के उन दावों को कमजोर कर दिया है, जिनमें विपक्षी दल भाजपा के सहयोगियों और कुछ विधायकों के बीच सेंध लगाने की संभावना जता रहा था। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद नामांकन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए हैं।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मंगलवार को भाजपा के सभी आठ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के समक्ष नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान अपना दल (सोनेलाल) के नेता और योगी सरकार में मंत्री आशीष पटेल तथा निषाद पार्टी के नेता और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की मौजूदगी ने खास तौर पर राजनीतिक संदेश दिया। दोनों सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं का भाजपा प्रत्याशियों के साथ खड़ा होना NDA के भीतर एकजुटता के संकेत के तौर पर देखा गया।

दरअसल, समाजवादी पार्टी की ओर से लगातार यह संकेत दिए जा रहे थे कि राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारकर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कुछ विधायकों को अपने पक्ष में लाया जा सकता है। अखिलेश यादव ने भी संकेत दिया था कि सपा तीसरे उम्मीदवार के जरिए मुकाबला दिलचस्प बना सकती है। सपा की रणनीति में पार्टी से अलग रुख रखने वाले कुछ विधायकों को अपने साथ लाने की संभावना भी शामिल मानी जा रही थी।

हालांकि, नामांकन के दौरान भाजपा खेमे में NDA के सहयोगी नेताओं की मौजूदगी और सपा के कुछ बागी माने जाने वाले विधायकों का भाजपा खेमे के साथ नजर आना विपक्ष की रणनीति के लिए झटका माना जा रहा है। सपा के बागी विधायकों में अभय सिंह और राकेश सिंह जैसे नाम भी चर्चा में रहे। इससे पहले 5 अक्टूबर की शाम सपा के बागी माने जाने वाले विनोद चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बाद में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीसरे उम्मीदवार को लेकर स्थिति साफ कर दी। उन्होंने लिखा कि अब उनका ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है। अखिलेश के इस बयान को उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर 2027 के चुनाव की तैयारी पर फोकस करने के संकेत के तौर पर देखा गया। यदि सपा की ओर से अंतिम समय में कोई बदलाव नहीं होता है तो राज्यसभा की सभी 10 सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।

भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए जिन आठ चेहरों को मैदान में उतारा है, उनमें अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। पार्टी ने OBC वर्ग से धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। अनुसूचित जाति वर्ग से विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत को जगह मिली है। वहीं, ब्राह्मण समाज से राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय तथा क्षत्रिय समुदाय से राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया गया है।

भाजपा की सूची में दो महिला चेहरों को शामिल किया गया है। प्रियंका रावत और श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी के जरिए पार्टी ने महिला प्रतिनिधित्व के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक भूमिका को देखते हुए इसे भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

नामांकन प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा ने बताया कि सभी आठ भाजपा उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र के दो-दो सेट दाखिल किए हैं। प्रत्येक सेट के साथ प्रस्तावक के तौर पर 10 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी पहले ही अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

भाजपा के उम्मीदवार नामांकन से पहले विधानसभा के सामने स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और समर्थकों के उत्साह के बीच सभी उम्मीदवार नामांकन दाखिल करने पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा के सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी ने सबसे ज्यादा राजनीतिक ध्यान खींचा।

भाजपा के प्रदेश संगठन और उम्मीदवारों की ओर से भी इसे 2027 के लिए सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कवायद के तौर पर पेश किया जा रहा है। राज्यसभा उम्मीदवार प्रकाश पाल ने सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले राजनीतिक विमर्श पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा ही वास्तव में PDA का सम्मान करती है। उन्होंने दावा किया कि 2027 का विधानसभा चुनाव सपा के PDA विमर्श की वास्तविकता सामने ला देगा।

वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे साफ है कि समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव में हार स्वीकार कर ली है। हालांकि सपा की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को 2027 की व्यापक चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल राज्यसभा चुनाव में भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवार मैदान में हैं। अगर नामांकन प्रक्रिया के बाद कोई नया उम्मीदवार सामने नहीं आता या किसी नामांकन में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आती, तो उत्तर प्रदेश की सभी 10 राज्यसभा सीटों पर निर्विरोध चुनाव होना तय माना जा रहा है। लेकिन इस चुनाव के दौरान लखनऊ में दिखाई गई भाजपा-NDA की एकजुटता ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की सियासत में एक नया संदेश जरूर दे दिया है।

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