मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
‘यूपी की नारी बन रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की निर्माता’, नवरात्रि पर CM योगी का बड़ा संदेश अतीक की जमीन पर बनेंगे 602 फ्लैट, CM योगी करेंगे 150 करोड़ की आवास योजना का भूमिपूजन यूपी में MLC की 11 सीटों पर BJP ने झोंकी ताकत, CM योगी से लेकर बड़े नेताओं तक संभाली कमान जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद बड़ा एक्शन, CJP के आशुतोष रांका और सौरव दास 5 दिन के लिए जेल भेजे गए ‘डिग्री सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, सपने साकार करने का जरिया’, छात्रों से बोले CM भगवंत मान आजम खान पर ED का शिकंजा, जौहर यूनिवर्सिटी केस में नई FIR; 416 करोड़ के अंतर की जांच उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाला पर एक साल का बैन, बिक्री से लेकर भंडारण तक पर रोक ‘नारी के सम्मान-स्वाभिमान के लिए समर्पित है सरकार’, CM योगी बोले- 2017 से पहले सुरक्षा पर लगा था ग्रहण जेल में आजम खां से ED की पूछताछ, जौहर ट्रस्ट के करोड़ों के चंदे पर सवाल यूपी के सभी 75 जिलों में खुलेंगे पंचगव्य आउटलेट, गोबर-गोमूत्र से बने उत्पादों को मिलेगा बाजार

ईद की नमाज के लिए मस्जिद खोलने पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार

ईद की नमाज के लिए मस्जिद खोलने पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार

उत्तर प्रदेश – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ईद पर सामूहिक नमाज के लिए प्रदेश के ईदगाहों व मस्जिदों को खोलने और जून महीने में जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति देने का समादेश जारी करने की मांग के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची अपनी मांग को लेकर सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन प्रस्तुत करे। यदि कोई आदेश नहीं होता है या प्रत्यावेदन लटकाए रखा जाता है तो वह हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है। सरकार को अर्जी दिए बगैर हाईकोर्ट में सीधे याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।

यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने शाहिद अली सिद्दीकी की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर कायम जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि समादेश जारी करने के लिए याची को अपनी मांग शासन के समक्ष रखनी चाहिए। कोई आदेश न होने या विपरीत आदेश होने के बाद याचिका दाखिल की जा सकती है। याची ने सरकार के समक्ष अपनी मांग रखे बगैर जनहित याचिका दाखिल कर समादेश जारी करने की मांग की है, जिसपर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

Share
अगला लेख → भारत की 'संजीवनी' का क्यों बचाव कर रहे हैं ट्रंप

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *