
प्रोटीन को अक्सर लोग वजन घटाने और मसल्स बनाने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने में इसकी भूमिका इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत, इम्यूनिटी मजबूत करने, हार्मोन और एंजाइम बनाने के साथ शरीर के विकास में भी मदद करता है। इसके बावजूद कई लोगों की रोजमर्रा की डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल नहीं होता। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि उम्र, वजन और शारीरिक गतिविधियों के हिसाब से शरीर को रोज कितने प्रोटीन की जरूरत होती है।
न्यूट्रिशनिस्ट गीतिका चोपड़ा के मुताबिक, प्रोटीन की जरूरत हर उम्र में अलग-अलग होती है। बच्चों को शारीरिक विकास के लिए, किशोरों को प्यूबर्टी के दौरान मांसपेशियों और टिश्यू के विकास के लिए, जबकि वयस्कों को मांसपेशियों को बनाए रखने और शरीर की मरम्मत के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे केवल जिम जाने या वजन कम करने वाले लोगों का पोषक तत्व समझना सही नहीं है।
स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर शरीर के प्रति किलोग्राम वजन पर रोजाना कम से कम 0.8 ग्राम प्रोटीन की जरूरत बताई जाती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी वयस्क का वजन 60 किलोग्राम है, तो उसे प्रतिदिन लगभग 48 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है। वहीं, बुजुर्गों में उम्र के साथ मांसपेशियों की कमी होने का खतरा बढ़ता है। ऐसे में उन्हें प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1 से 1.2 ग्राम प्रोटीन की जरूरत हो सकती है। हालांकि, उनकी किडनी की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना भी जरूरी है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की प्रोटीन संबंधी जरूरत भी सामान्य वयस्कों से अधिक हो सकती है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रोटीन की सही मात्रा केवल उम्र से तय नहीं होती। इसके लिए शरीर का वजन, रोजाना की शारीरिक गतिविधियां, व्यायाम, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे कारक भी महत्वपूर्ण हैं। जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उनकी जरूरत सामान्य लोगों से अधिक हो सकती है। इसलिए अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा तय करते समय व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए।
प्रोटीन की पूर्ति के लिए महंगे सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है। भारतीय भोजन में कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जिनसे पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है। दाल, राजमा, छोले, चना, पनीर, दूध, दही, सोयाबीन और टोफू अच्छे शाकाहारी स्रोत हैं। वहीं, अंडे, चिकन और मछली भी प्रोटीन के बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
न्यूट्रिशनिस्ट गीतिका चोपड़ा सलाह देती हैं कि पूरे दिन की प्रोटीन जरूरत को एक ही बार में पूरा करने के बजाय इसे नाश्ते, दोपहर और रात के भोजन में बांटकर लेना बेहतर है। इससे दिनभर के भोजन में प्रोटीन के अच्छे स्रोत शामिल किए जा सकते हैं। ध्यान रखें कि प्रोटीन केवल मांसपेशियां बनाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर के सामान्य विकास, मरम्मत और बेहतर कार्यप्रणाली के लिए भी जरूरी है।



