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आज वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे, एक डोनर दे सकता है 8 लोगों को नई जिंदगी

आज वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे, एक डोनर दे सकता है 8 लोगों को नई जिंदगी

हर साल 13 अगस्त को वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे मनाया जाता है। इस दिन का मकसद लोगों को अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक करना और उन मरीजों के लिए उम्मीद पैदा करना है, जिन्हें ट्रांसप्लांट के लिए अंगों का इंतजार है। एक अंगदाता कई लोगों की जिंदगी बचाने में मदद कर सकता है और एक डोनर से 8 लोगों तक को नया जीवन मिलने की संभावना होती है।

मृत्यु के बाद अंगदान के जरिए किडनी, लिवर, हार्ट, फेफड़े, पैंक्रियास और आंत जैसे महत्वपूर्ण अंग जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं। इसके अलावा कॉर्निया, त्वचा और हड्डियों जैसे टिश्यू भी कई लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं

यही वजह है कि अंगदान को अक्सर ‘मौत के बाद भी जिंदगी देने’ का माध्यम कहा जाता है। एक व्यक्ति का फैसला कई परिवारों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।

भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। 2025 में देश में 20,138 से अधिक ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए, फिर भी हजारों मरीज किडनी, लिवर और दूसरे अंगों के लिए इंतजार कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जागरूकता की कमी, अंगदान को लेकर गलत धारणाएं और परिवारों की झिझक डोनर ऑर्गन्स की उपलब्धता बढ़ाने में बड़ी चुनौतियां हैं।

अंगदान के लिए सिर्फ उम्र को आधार नहीं माना जाता। संभावित डोनर की मेडिकल स्थिति और अंगों की उपयुक्तता का मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है। जीवित व्यक्ति भी कुछ परिस्थितियों में एक किडनी या लिवर का हिस्सा दान कर सकता है, जबकि मृत्यु के बाद कई महत्वपूर्ण अंग और टिश्यू दान किए जा सकते हैं।

अंगदान का फैसला सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है। परिवार के सदस्यों को भी अपनी इच्छा के बारे में पहले से बताना महत्वपूर्ण है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे उस फैसले को समझ सकें और संबंधित प्रक्रिया में सहयोग कर सकें।

वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे का संदेश साफ है—आपका एक फैसला किसी दूसरे इंसान के लिए जिंदगी की नई शुरुआत बन सकता है।

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